नगीना। हौसला बुलंद हो तो कठिन चुनौतियां भी कुछ नहीं बिगाड़ पातीं। इसे एक नहीं कई बार साबित भी किया है। ऐसे ही लोगों में शामिल हैं मेवात की बलवंत देवी, सबीला जंग, शबाना, जुबैदा और अमानत। गांव मालब की 80 वर्षीय बलवंत देवी ने शादी नहीं की है और देश के बंटवारे का दंश झेला है। बंटवारे के बाद मेवात में पाकिस्तान से आए विस्थापितों को मेवात में बसाने में अहम रोल रहा है। वह नूंह के गांवों मेें जाकर बच्चाें को पढ़ाती भी थी। मेवात में उनकी पहचान समाज सेविका के रूप में है।
नगीना के गांव घागस की 27 वर्षीय सबीला जंग का भी सामाजिक सरोकार से गहरा नाता है। वह मेवात के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने अभियान चलाया और महिलाओं में खून की कमी के खिलाफ जागरूकता फैलाई।
वहीं दूसरी और पुन्हाना खंड के गौहेता हाजीपुर की 8 वीं कक्षा की छात्रा शबाना पुत्री इलियास की भी मेवात में खास पहचान है। विकलांग होने के बावजूद उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में अपना हुनर दिखाया है। विशेष श्रेणी में वह मेवात क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है। उसने राज्य स्तर पर कई गोल्ड मेडल जीते हैं।
मालब गांव की 10वीं की छात्रा अमानत पुत्री अकबर के हौसले की भी हमें दाद देनी होगी। एक पैर से महरूम होने के बावजूद पढ़ाई को लेकर उसके हौसले बेहद बुलंद हैं। इसी अवस्था में लंबी दूरी तय कर वह पढ़ाई करने जाती है। इसके साथ पारिवारिक जिम्मेदारियां भी निभा रही है। फिरोजपुर झिरका गांव के साकरस की 45 वर्षीय जुबैदा ने ग्राम-विकास के क्षेत्र में अपनी खास पहचान बनाई है। बच्चियां शिक्षा में खास दिलचस्पी लें इसके लिए वह अपने इलाके में विशेष काम कर रही हैं।