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आज खुलेंगे मंदिर के कपाट

Palwal Updated Wed, 17 Apr 2013 05:30 AM IST
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पलवल। जिले के अंतर्गत आने वाले दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे पर एक ऐसा मंदिर भी है जिसके कपाट वर्ष में केवल दो बार कुछ घंटों के लिए खुलते हैं। नवरात्र में सप्तमी के दिन मां काली की पूजा के लिए आम जनता के लिए मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। सप्तमी के दिन दोपहर बाद से श्रद्धालुओं भीड़ मंदिर के बाहर एकत्रित होने लगती है।
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जवाहर नगर कैंप स्थित मढ़ी के नाम से मशहूर मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक है। सुबह पहला तारा नजर आते ही मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं। मंदिर के महंत तीर्थदास जी महाराज बताते है कि करीब सुबह साढे़ छह बजे मंदिर खुल जाता है। देर रात तक मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।
मंदिर की क्या है खासियत
महंत तीर्थ दास जी महाराज ने बताया कि इस मंदिर की विशेषता है कि यहां देवी के नौ रूप, भैरों के नौ रूप व काली के नौ रूप विराजमान है। मंदिर की प्रतिमाएं नौ सामग्रियों जैसे गुगल, गाय का गोबर, चंदन, मिट्टी, देसी घी, गोला, पीपल, बड़ की लकड़ी, गाय के दूध के मिश्रण से बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रतिमाएं हजारों साल पुरानी हैं। उन्होंने कहा कि मान्यता है कि अगर किसी गर्भवती महिला का गर्भ सातवें या आठवें माह में गिरता है तो इन प्रतिमाओं के दर्शन करने से उसकी समस्या समाप्त हो जाती है। जो लोग दर्शन करने के लिए आते हैं वे यहां सरसों का तेल, नारियल और अनाज माता को भेंट करते हैं।
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ईंटों के चूल्हे पर बनता है प्रसाद
मंदिर के महंत ने बताया कि मंदिर में करीब सौ साल से पुराना पीपल और बड़ का वृक्ष है। इन्हीं वृक्षों की लड़कियों से वे स्वयं अपने हाथों से भक्तों के लिए प्रसाद तैयार करते हैं। यहां चाहे कितनी संख्या में भक्त आ जाएं लेकिन आज तक प्रसाद में कमी नहीं आई है। अष्टमी के दिन मंदिर में सुबह 10 बजे से 12 बजे तक कीर्तन किया जाता है और उसके बाद प्रसाद वितरण किया जाता है।
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