पंचकूला। फर्जी कागजात के आधार पर बैंक से लोन लेने के पांच आरोपियों को सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को सजा सुना दी। अदालत ने सभी आरोपी को एक-एक साल की सजा और दस-दस हजार रुपये जुर्माना लगाया। आरोपियों में स्टेट बैंक आफ इंडिया के सेक्टर-16 स्थित शाखा के तत्कालीन चीफ मैनेजर भी शामिल हैं। हालांकि अदालत ने डिप्टी मैनेजर बीके शर्मा को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने आरोपी दीपक कुमार मल्होत्रा, नीलम मल्होत्रा, कमल कुमार, हरजीत सिंह और बैंक के चीफ मैनेजर लोकेश शर्मा को एक-एक साल की सजा व दस-दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
यह मामला साल 2002 का है। आरोप के मुताबिक दीपक कुमार मल्होत्रा ने 11 मई 2002 को पुरानी कार खरीदने के लिए चार लाख के लोन के लिए अप्लाई किया था। लोन लेने के लिए उसने फर्जी राशन कार्ड लगाया। खास बात यह थी कि जिस गाड़ी को खरीदने के लिए उसने लोन अप्लाई किया था वह पहले से ही उसके नाम थी। इसके बावजूद उसका लोन एक दिन में पास कर दिया गया। मल्होत्रा की पत्नी नीलम ने भी सेकेंड हैंड कार खरीदने के लिए चार लाख रुपये के लोन को अप्लाई किया। नीलम का भी उसी दिन लोन पास कर दिया गया। चार्जशीट के मुताबिक उसने भी फर्जी राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज लगाकर लोन लिया। फर्जीवाडे़ में नीलम ने कार के रजिस्ट्रेशन नंबर की जगह बजाज स्कूटर का रजिस्ट्रेशन नंबर लिख दिया था।
कुछ इसी तरह मल्होत्रा के भाई कमल कुमार ने भी दस जुलाई 2002 को सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदने के लिए चार लाख रुपये लोन के लिए अप्लाई किया। यह लोन भी उसी दिन पास कर दिया गया। कमल ने भी फर्जी दस्तावेज लगाए। साजिश ऐसी थी कि कमल ने एड्रेस प्रूफ जमा ही नहीं कराए। इसी तरह हरजीत सिंह ने भी सेकेंड हैंड कार खरीदने के लिए सवा तीन लाख रुपये का लोन अप्लाई किया और उसे भी लोन दे दिया गया।
इस मामले में सीबीआई ने एसबीआई के डिप्टी मैनेजर बीके शर्मा व चीफ मैनेजर लोकेश शर्मा को भी आरोपी बनाया और पूरे मामले में करीब सवा 15 लाख के गबन की बात सामने आई। अदालत ने सुबूतों के अभाव में बीके शर्मा को तो बरी कर दिया, जबकि लोकेश शर्मा, दीपक कुमार मल्होत्रा, नीलम, कमल कुमार व हरजीत सिंह को दोषी करार दिया था।