पानीपत। एनएफएल स्थित केंद्रीय विद्यालय की लड़ाई में अभिभावकों का पलड़ा भारी हो गया है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिभावकों की याचिका मंजूर कर स्कूल प्रबंधन, प्रिंसिपल और एनएफएल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है।
उनको 15 मई तक अपने जवाब दाखिल करने होंगे। इसके बाद स्कूल के साढ़े सात सौ विद्यार्थियों और करीब दो सौ स्कूल स्टाफों को स्कूल के खुलने की उम्मीद बंध गई है।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्रीय विद्यालय एनएफएल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों की याचिका को मंजूर कर लिया है।
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव हरियाणा, केंद्रीय विद्यालय संगठन चेयरमैन, एनएफएल एमडी एवं चेयरमैन गौतम बुद्धनगर यूपी, चीफ जनरल मैनेजर एनएफएल पानीपत और एनएफएल स्कूल प्रिंसिपल को नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट ने इन सबको तीन दिन का समय दिया है और 15 मई तक जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। केंद्रीय विद्यालय एनएफएल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने एडवोकेट मोमिन मलिक के माध्यम पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट याचिका दायर की थी। उनका कहना है कि स्कूल को जान बूझकर बंद किया जा रहा है। जिससे विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है।
अभिभावकों ने स्कूल और एनएफएल में रिसीव कराया नोटिस
अभिभावकों और विद्यार्थियों की हाईकोर्ट का नोटिस मिलने के बाद स्कूल को लेकर उम्मीद जग गई है और काफी उत्साहित हैं। अभिभावक सोमवार को हाईकोर्ट का नोटिस लेकर स्कूल और एनएफएल में पहुंचे। उन्होंने दोनों जगह हाईकोर्ट का नोटिस रिसीव कराया और दावा किया वे जल्द ही बाकी लोगों को नोटिस रिसीव करा देंगे।
आगे होगा ये
इन सब अधिकारियों को तीन दिन के अंदर-अंदर खुद या अपने वकील के माध्यम अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद हाईकोर्ट केस की सुनवाई करेगा और दोनों पक्षों को सुनकर मामले में फैसला देगा। कोई भी पक्ष अपेक्षाकृत फैसला नहीं मिलने पर इसे लेकर इससे अगली बैंच या सुप्रीमकोर्ट में जा सकता है।
यह है मामला
एनएफएल स्थित केंद्रीय विद्यालय को केंद्रीय विद्यालय संगठन दिल्ली ने अप्रैल माह के पहले सप्ताह में बंद कर दिया था और विद्यार्थियों को नोटिस देकर इस बारे में अवगत करा दिया था। संगठन ने स्कूल बंद करने के पीछे एनएफएल द्वारा वित्तीय मदद न मिलना कारण बताया था। इसके बाद स्कूल में पढ़ने वाले करीब 750 विद्यार्थी व स्कूल के शिक्षक व गैर-शिक्षक वर्ग की चिंता बढ़ गई थी। अभिभावक इसको लेकर एकजुट हो गए और स्कूल शुरू कराने को लेकर संघर्ष कर दिया। अभिभावकों ने एकजुटता दिखाते स्कूल बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया। वे इसको केंद्रीय स्कूल संगठन और प्रशासनिक अधिकारियों से मिले। उनको यहां पर आश्वासन के सिवाय कुछ न मिलने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
केस हुआ दर्ज, पर नहीं हटे पीछे
वार्ड-14 की पार्षद मंजू कादियान के पति रामचंद्र कादियान और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों पर धारा 144 के उल्लघंन पर मुकदमा भी दर्ज हो गया, लेकिन वे पीछे नहीं हटे। रामचंद्र कादियान और अन्य लोग गत माह बच्चों को लेकर लघु सचिवालय पर पहुंच गए थे। उन्होंने वहां पर क्लास लगवा दी थी। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने धारा 144 के तहत कई अभिभावकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था। रामचंद्र कादियान, रोहतास, रणधीर और यशपाल ने बताया कि अभिभावक स्कूल को लेकर हर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।