मतलौडा में बारिश और तेज हवाओं में जमीन पर बिछी धान की फसल को काटने के लिए किसानाें को श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। किसानाें को चिंता सता रही है कि अगर समय रहते इस फसल को नहीं काटा तो फसल खराब हो जाएगी।
ऐसे में किसान हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। किसानाें ने ऐसे ही हथकंडे गांव उरलाना जा रहे 15-16 प्रवासी श्रमिकाें पर अपनाते हुए उन्हें बस से उतारकर ट्रैक्टर ट्राली में जबरन सवार कराने का प्रयास किया। इस पर श्रमिक भड़क गए और डंडे लेकर किसानाें पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से किसान घबरा गए और वहां से भाग खडे़ हुए।
वीरवार को 15-16 प्रवासी मजदूरों की एक टोली बस में सवार होकर मतलौडा के गांव उरलाना में अपने किसान के पास जा रही थी। मजदूरों से मालूम पड़ा कि कुछ किसान जबरदस्ती खेतों में ले जाते हैं। यह टोली पहले ही अपने सामान के साथ डंडे लेकर आई थी। ये बस अड्डे से उरलाना के लिए चल पड़े। इसी बीच बस में ही सवार तीन किसानों ने पानीपत से ही उन पर निगाह रखना शुरू कर दिया।
बस में आ रहे किसानों ने मोबाइल पर अपने साथियों को सूचना दे दी। योजना के मुताबिक कई किसानों ने रास्ते में गांव भालसी के पास स्पीड ब्रेकर पर बस को रुकवा लिया और बस में सवार तीन किसानों ने आनन फानन में अचानक मजदूरों को धक्के देकर नीचे उतार लिया। नीचे खडे़ कई किसानाें ने फिल्मी अंदाज में श्रमिकाें को जबरदस्ती पकड़-पकड़ कर ट्रैक्टर-ट्राली में डालना शुरू कर दिया। इस पर युवा मजदूर भड़क गए और डंडे लेकर किसानाें पर टूट पडे़। अचानक हमले से किसान भी घबरा गए और वे इधर-उधर भाग लिए। श्रमिकाें की टोली ने किसानाें को दूर तक दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। इसके बाद मजदूर बस में चढ़कर चलते बने।
पुलिस और सरपंच एक-दूसरे के सहारे
क्षेत्र के कुछ सरपंच चौधर के लिए पुलिस कर्मियों का सहारा लेते हैं, जिससे आने जाने वाले प्रवासी मजदूरों को डरा कर खेताें तक ले जाएं। उधर खेतीबाड़ी से जुडे़ कई पुलिसकर्मी यह मानकर सरपंचों के पास पहुंच रहे हैं। इसलिए वह गांव से जरूर कुछ श्रमिक उनके साथ भेज देगा। लेकिन इनमें से श्रमिक किसी के पास नही हैं। इन दिनों न तो पुलिस और न ही सरपंचाें का रौब काम कर रहा।
गिरी फसल की कटाई पांच हजार
बारिश और तेज हवाआें से गिरी धान की फसल खराब होती जा रही है। किसान मजदूरों के लिए भटक रहे हैं। हालात को देखते हुए श्रमिकाें ने भी धान कटाई के रेट बढ़ा दिए है। कटाई 3500 रुपये प्रति एकड़ से बढ़कर पांच हजार प्रति एकड़ तक पहुंच चुकी है। इसके बाद भी मजदूर नहीं मिल रहे। किसानों के लिए इस बार धान की कटाई आफत बन कर खड़ी है।
पंजाब से बुलाई जा रही है कंबाइन
पर्याप्त श्रमिक नहीं मिलने से परेशान कुछ किसानों ने पंजाब और दूसरे इलाकों से धान कटवाने के लिए कंबाइन को बुलाया है। किसान राजपाल, दीपक कुमार, रामकिशन और कृष्ण कुमार ने बताया कि एक तो गिरी हुई धान की फसल में नुकसान बढ़ रहा है और दूसरे गेहूं की बिजाई से भी वे लेट हो रहे हैं। इसलिए उन्होंने कंबाइन को बुलवाया है। यह बात अलग है कि कंबाइन से काटी धान 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल कम बिकती है।