चंबा। दीपावली पर्व के उपलक्ष्य पर पिछले 40 साल से जुलाहकड़ी के गोबिंद राम लोगों के घरों को रोशन कर रहे हैं। मिट्टी के दीये, चिलम, कुंभ और अन्य वस्तुएं तैयार करने वाले गोबिंद राम को इस बार दिवाली पर अच्छी कमाई होने की उम्मीद है। इस हस्तशिल्प कलाकार ने बताया कि सरकार भले ही लघु उद्योग स्थापित करने और हस्तशिल्प वस्तुओं को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन आज तक उनकी कलाकारी को कोई तरजीह नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि बीते 40 साल से बाजार में यहां-वहां दुकानदारी सजाकर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं।
गोबिंद राम मूल रूप से पाकिस्तान के बनुघुआट के रहने वाले हैं। उनके पिता स्वर्गीय राम चंद पाकिस्तान स्थित बनुघुआट में मिट्टी की वस्तुएं तैयार करते थे। देश के विभाजन के बाद वे भारत चले आए थे। उन्होंने कहा कि वे 65 सालों में दोबारा कभी पाकिस्तान नहीं गए। गोबिंद राम ने कहा कि मिट्टी के वर्तन और अन्य वस्तुएं तैयार करना उनका पुस्तैनी काम है। इसमें परिवार के सभी सदस्य सहयोग करते हैं। दीपावली पर बिकने वाले मिट्टी के दीये के अलावा वह पानी ठंडा रखने वाले मिट्टी के घड़े भी तैयार करते हैं। बदलते जमाने के साथ कामकाज में भी काफी बदलाव आए हैं। गोबिंद ने बताया कि पिछले वर्ष दीपावली को उन्होंने 5-6 हजार की कमाई की थी। इस बार इससे ज्यादा कमाने की उम्मीद है।
ऐसे तैयार करते हैं....
दीपावली पर्व के लिए दीये और मिट्टी की अन्य वस्तुएं तैयार करने के लिए उन्हें पहाड़ से अच्छी किस्म की मिट्टी खोदनी पड़ती है। इसके बाद इस मिट्टी से पत्थर अलग क रने के लिए इसे छानना पड़ता है। मिट्टी को उचित पानी में घोलकर इसे चरखे पर रखा जाता है और इसका निर्माण किया जाता है।