कुल्लू। सैकड़ों देवी देवताओं के समागम से भगवान रघुनाथ की नगरी स्वर्ग में बदल जाएगी। धूप की खुशबू और फूलों से पूरा शहर महक उठेगा। जिला कुल्लू के आराध्य देवी-देवता मंगलवार की सांझ को ढालपुर मैदान में डेरा जमा लेंगे। एक बार फिर कुल्लू की धरा तपोवन में बदल जाएगी। रंग-बिरंगे फूलों, चंद्रहारों, बेशकीमती सोने-चांदी तथा अन्य अष्टधातुओं के आभूषणों से लदे देवरथ और उनके आगे श्रद्धा से झुकने वाले हजारों शीश होंगे। कुछ इसी तरह का नजारा होगा अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में।
दशहरा उत्सव के अगुआ स्वयं भगवान रघुनाथ के साथ बिजली महादेव, अधिष्ठाता देव खुड़ीजल, शृंगा ऋषि तथा बड़ा छमाहू से लेकर मां पार्वती, देवी हड़िंबा, माता बूढ़ी नागिन और व्यास ऋषि समेत सैकड़ों देवी-देवता अपने भक्तों के उद्धार के लिए आएंगे। 23 अक्तूबर की शाम को यहां जिला भर के देवी देवता पहुंच जाएंगे। अगली सुबह दस बजे अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का आगमन होगा। आनी, निरमंड, बंजार, सैंज, ऊझी घाटी, खराहल घाटी, महाराजा कोठी, दियार और मणिकर्ण इलाकों से आने वाले देवी देवताओं से ऐतिहासिक ढालपुर मैदान प्रतिष्ठित हो जाएगा। 30 अक्तूबर तक चलने वाले इस देव समागम में लोग कई तरह की मन्नतें लेकर देवताओं के पास आते हैं।
भगवान रघुनाथ की अध्यक्षता में देवाधिदेव शृंगा ऋषि, अधिष्ठाता देव खुडीजल, देवता कपिल मुनि, देव बुझारी कोट, देवता चंभू, देवी दुराह, बिजली महादेव, देवी हिडि़ंबा, मारकंडेय ऋषि, टकरासी नाग, चोतरू नाग तथा बालू नाग दशहरा में शिरकत करेंगे। इस देव महाकुंभ में देवताओं का मिलन आकर्षण भरा होता है। अधिष्ठाता देव खुडीजल के कारदार शेर सिंह दीपक, देवता कपिल मुनि के भंडारी अमर ठाकुर, देवता बुझारी कोट के कारदार एवं जिला कारदार संघ के सचिव भागे राम राणा का कहना है कि मनुष्य ही नहीं बल्कि देवता भी परस्पर मिलते हैं। यह मिलन दशहरा समाप्ति तक चलता रहेगा।
देवताओं के शिविर चकाचक
दशहरा उत्सव समिति के निर्देशानुसार नगर परिषद कुल्लू ने देवताओं के अस्थाई शिविरों को चकाचक कर दिया है। देवताओं के शिविरों में पानी की उचित व्यवस्था के साथ बिजली के भी बेहतर इंतजाम किए हैं। दशहरा समिति के उपाध्यक्ष एवं जिलाधीश डा. अमन दीप गर्ग ने कहा कि देवी देवताओं के अस्थाई शिविरों में रहने वाले हारियानों और कारकूनों को किसी तरह की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।