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बिना पानी चौपट न हो जाएं फसलें

Kullu Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
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कुल्लू। कम बारिश के चलते किसान पहले ही परेशान हैं वहीं ऊपर से सिंचाई योजना दुरुस्त न होने से लोगों की मुसीबतें और बढ़ गई हैं। आलम यह है कि साल दर साल कृषि उत्पादन घटता जा रहा है। यह मामला है, जिला कुल्लू के अति दुर्गम क्षेत्र शैंशर इलाके का।
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विभाग ने अस्सी के दशक में बागी कशियाड़ी-जाड़ा सिंचाई योजना का निर्माण किया था। लेकिन इस योजना का लाभ इलाके के किसानों को आज तक नहीं मिल पाया। विभागीय अनदेखी के चलते दो किलोमीटर लंबी सिंचाई योजना आज बदहाली के आंसू बहा रही है। भूस्खलन और मलबे के कारण कूहल जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसकी रिपेयर को लेकर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे। शैंशर और देहुरीधार पंचायत के लोगों का कहना है कि शुरुआती दौर में कुछ गांव के खेतोें को पानी आया था लेकिन बाद में न तो पानी आया और न ही योजना अंतिम छोर तक पहुंच सकी। किसान हीरा लाल, महेंद्र सिंह, मनसू राम, आलम चंद, चमेलू देवी, पूर्व उप प्रधान शैंशर मोहर सिंह,ठाकुर दत और लोतम राम ने कहा कि इस योजना का शैंशर पंचायत के खाईण, बजाहरा, पटाहरा, चनाहिड़ी, जंगला, डमाहिड़ी, सेरी, मणाहरा, सनोगी, जाड़ा, बागी, कश्यिारी के अलावा देहुरी पंचायत के तूंग, तलियाहरा और रूआड गांवों के लोगाें की सुविधा के लिए निर्माण किया था। लाखों रुपये खर्च कर सालों बाद तैयार हुई यह योजना अपने छोर तक नहीं बन पहुंच पाई है। कड़ी मशक्कत के बाद कठोर चट्टानों और पहाड़ों को चीर कर इसका निर्माण किया है। बावजूद किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। किसानों की 500 बीघा खेती बिना पानी के प्यासी है।
किसानों के मुताबिक शैंशर बंजार का एक मात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस व्यवसाय से शैंशर और देहुरीधार पंचायत के 30 फीसदी किसान जुड़े हैं। लेकिन बिना पानी के धान का उत्पादन भी मुश्किल है। सूखे के चलते किसानों का रुझान धान की खेती के साथ अन्य फसलों से भी उठता जा रहा है। किसानों ने आईपीएच विभाग से धान की खेती बचाने तथा किसानों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए सिंचाई योजना की रिपेयर करवाने की मांग की है।
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