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मक्की की रोटी से पिज्जा-बर्गर को मात

Kullu Updated Sun, 27 Oct 2013 05:41 AM IST
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कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में मक्की की रोटी और सरसों का साग पिज्जा और बर्गर जैसी पसंदीदा चीजों पर भारी पड़ रहा है। दशहरा के लिए सजी मार्केट में लगे दो स्टालों में अब तक 7.5 क्विंटल मक्की के आटे की रोटियां परोसी जा चुकी हैं। इन स्टालों पर रोजाना 200 से अधिक ग्राहक पहुंच रहे हैं। इसमें देशी ही नहीं विदेशी सैलानी भी चटकारे लगाने में आगे हैं। कई बड़े अधिकारी इन स्टालों पर मक्की की रोटी खाने के लिए लाइनों में लग रहे हैं। मात्र 40 रुपये में मक्की की दो रोटियां और साग घाटे का सौदा नहीं है।
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कुल्लू समेत ऊपरी बेल्ट में मक्की की खेती कम हो गई है। अब लोग खाने के लिए भी कम ही मक्की उगाते हैं। वहीं, सैलानी में त्योहार में अकसर ऐसा भोजन पसंद करते हैं जो सादा और पारंपरिक हो। ऐसे में ढालपुर मैदान में लगे ये स्टाल स्थानीय लोगों और पर्यटकों को खूब भा रहे हैं। दिल्ली से यहां घूमने आए अमित, स्नेहा, आंचल, हरियाणा के लोकेश, अली हसन का कहना है कि मक्की की रोटी खाने में उन्हें आनंद आया। उन्होंने तो ब्रेकफास्ट भी मक्की की रोटी के साथ किया। स्टाल संचालक मंडी के सराज निवासी हरजी राम ने बताया कि 14 अक्तूबर को दशहरा उत्सव से लेकर आज तक उन्होंने 4 क्विंटल मक्की आटे की रोटी बेची। उन्होंने बताया कि वे कुल्लू दशहरा, मंडी शिवरात्रि और रामपुर के लवी मेले में 25 सालों से मक्की और साग की डिश परोसते आ रहे हैं। हरजी का कहना है कि वे अपने परिवार का पालन पोषण मक्की की रोटी बेचकर ही करते हैं। उधर, दूसरे स्टॉल संचालक बिलासपुर की अनीता ने बताया कि उन्होंने 3.5 क्विंटल मक्की के आटे की रोटियां बेचीं। प्रतिदिन 200 के करीब ग्राहक उनके स्टाल पर रोजाना पहुंच रहे हैं। इनमें विदेशी सैलानी और अधिकारी भी हैं।
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