उदयपुर। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्र लाहौल घाटी में फंसे रेफर मरीज बंद पिंजरे में कैद पंछी की तरह छटपटा रहे हैं। बर्फ में कैद छह मरीजों के साथ 307 लोग हेलीकाप्टर की राह ताक रहे हैं। हालांकि, शनिवार को लाहौल घाटी में मौसम साफ रहा, लेकिन हेलीकाप्टर की उड़ान नहीं हुई। खराब मौसम के बीच लाहौल के लिए लगातार उड़ान शेड्यूल जारी किया जाता है लेकिन शनिवार को घाटी में मौसम हेलीकाप्टर की उड़ान के लिए बिल्कुल सही था। बताया जा रहा है कि हेलीकाप्टर को शनिवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह दिल्ली ले गए हैं। वहीं, लाहौल घाटी में हुई भारी बर्फबारी के चलते गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल केलांग भी नहीं पहुंचाया जा सकता है। ऐसे में इलाज को घाटी से बाहर रेफर किए मरीजों का जीवन हेलीकाप्टर के भरोसे है। घाटीवासियों ने आरोप लगाया है कि जब मौसम खराब होता है तो लाहौल के लिए उड़ान शेड्यूल जारी कर दिया जाता है। जब मौसम साफ होता है तो उस दिन हेलीकाप्टर की उड़ान नहीं होती है। घाटी के लिए पांच दिन पूर्व जारी शेड्यूल के तहत पहली उड़ान भुंतर से स्तींगरी, दूसरी भुंतर-तांदी और उसी बीच गाेंधला हैलीपेड के लिए भी ट्रायल प्रस्तावित था। वापसी में गोंधला और सिस्सू की सवारियों को कुल्लू ले जाना था। तीसरी उड़ान भुंतर-बारिंग-तिंदी-तिंगरेट और भुंतर के बीच भरी जानी थी। लेकिन, मौसम साफ हुआ तो हेलीकाप्टर भी गायब हो गया है। उपायुक्त लाहौल-स्पीति वीर सिंह ठाकुर ने बताया कि शनिवार के लिए कोई शेड्यूल जारी नहीं था। घाटीवासी वीर सिंह राणा, अशोक कुमार, सूरज ठाकुर और महेंद्र सिंह ने बताया कि खराब मौसम के बीच लाहौल के लिए शुक्रवार तक शेड्यूल जारी था, लेकिन शनिवार को मौसम साफ रहा और कोई उड़ान नहीं भरी गई। उन्होंने आरोप लगाया है कि हेलीकाप्टर का शेड्यूल इंटरनेट देखकर जारी कर दिया जाता है।