मनाली। उपमंडल मनाली के हलाण-दो में निर्माणाधीन एक पावर प्रोजेक्ट तबाही का मसाला तैयार कर रहा है। डंपिंग साइट होने के बावजूद मलबा सीधे नाले और चरागाहों में डंप किया जा रहा है। परियोजना की ओर से हलाण गांव में सड़क का निर्माण कार्य किया जा रहा है। सड़क से निकलने वाले मलबे को जंगल तथा ग्रामीणों की चरागाह में फेंका जा रहा है। ऐसे में जहां जंगल में दर्जनों पेड़ाें को नुकसान पहुंच रहा है तो वहीं लोगों की चरागाहों पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। परियोजना नाले के बीचोंबीच डैम का निर्माण भी कर रही है और यहां से निकलने वाले मलबे को नालेे में ही डाला जा रहा है। इतना ही नहीं, परियोजना स्थल पर काम कर रहे सैकड़ों मजदूरों के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें शौच के लिए नाले का ही रुख करना पड़ रहा है। हैरान भरा है कि नाले से जहां खेतों के लिए सिंचाई की जाती है, वहीं पीने के पानी का मुख्य स्रोत भी यही है। परियोजना न केवल प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रही है बल्कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों को भी दरकिनार किया जा रहा है। परियोजना का डैम स्थल करीब आठ हजार फुट की ऊंचाई पर है। इसके ठीक नीचे कई गांव बसे हुए हैं। बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में यह अवैध मलबा खतरनाक साबित हो सकता है। जगथम गांव सुधार समिति अध्यक्ष धर्म चंद, सचिव पन्ना लाल, प्रवक्ता वीर चंद, वार्ड पंच हीरा देवी सहित मौके पर पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि वे अपनी समस्याओं को लेकर कई वार परियोजना प्रबंधकों से गुहार लगा चुके हैं कि प्रकृति का सीना इस तरह छलनी न किया जाए, लेकिन नियमों को ताक पर रख कर परियोजना का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। मामले को लेकर जब परियोजना प्रबंधन से संपर्क साधा गया तो उनकी ओर से इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। उधर, एसडीएम मनाली विनय धीमान ने कहा कि पर्यावरण विभाग सहित वन विभाग को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना की ओर से अगर अनियमितताएं बरती गई हैं तो कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।