उरला (मंडी)। मंडी जिले में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके चलते लोगों को निजी अस्पतालों में अपना उपचार करवाना पड़ रहा है। हालांकि जिले में लोगों की सुविधा के लिए मंडी में सात एफआरयू खोले गए हैं, लेकिन उक्त सभी एफआरयू बगैर सुविधाओं के सफेद हाथी बने हुए हैं। आलम यह है कि कहीं चिकित्सक नहीं है तो कहीं मात्र बोर्ड लगा कर ही एफआरयू का दर्जा दे दिया गया है। ऐसे में लोगों का एक ही सवाल है कि जब स्वास्थ्य सुविधाएं ही नहीं तो फिर वे क्यों दें वोट? स्वास्थ्य विभाग के नियम के अनुसार एक एफआरयू में कम से कम छह विशेषज्ञ चिकित्सक होने चाहिए, जबकि मंडी जिले में जोनल अस्पताल को छोड़कर किसी भी अस्पताल में एक से अधिक चिकित्सक नहीं है। मंडी के देविंद्र कुमार, मनोज कुमार, जोगिंद्रनगर के प्रेम सिंह, पधर के किरण चौहान, चंद्र यादव, राजीव कुमार, सोहन सिंह, पाली से मोनिका ठाकुर, सुमित्रा ठाकुर, रेखा, चंपा देवी सहित अन्य लोगों का कहना है कि चाहे जो भी सरकार सत्ता में रही हो, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हो सका है। उक्त लोगों का कहना है कि सरकारी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं न होने के चलते लोगों को निजी अस्पतालों में उपचार करवाना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं नेता-
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर कहते हैं कि भाजपा ने प्रदेश में अपने चहते लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं में कोेई सुधार नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आते ही स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करेगी।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती का कहना है कि भाजपा ने सत्ता में आने के बाद से ही स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है। जो कुछ करना बच गया है, उसे सत्ता में आते ही पूरा कर लिया जाएगा।