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बच्चों का संदेश सुनने की फुर्सत नहीं

Mandi Updated Fri, 06 Jun 2014 05:32 AM IST
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मंडी। पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ के नारों के साथ जिले भर में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्कूली बच्चों ने जून की तपती धूप में धरती और पर्यावरण को बचाने का आह्वान किया। हर साल की तरह इस बार भी पांच जून को पर्यावरण बचाने की रस्म अदा की गई, मगर जिन लोगों के लिए अपनी पढ़ाई छोड़कर मासूम बच्चे सड़कों पर उतर कर चिल्ला रहे थे। उनके पास इन्हें सुनने के लिए वक्त नहीं था। पर्यावरण का असली मकसद यहां दबकर रह गया। ऐसा लगता है कि विभिन्न दिवसों को लेकर निकलने वाली रैलियां अब महज रस्म अदायगी तक ही सिमट कर रह गई है।
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समाज का इससे जुड़ाव नहीं हो पा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के बच्चों के इस संदेश को आम जनमासन कितनी गंभीरता से लेता है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंडी शहर के चौहट्टा बाजार में विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने रैली निकाल कर पेड़ बचाओ पर्यावरण बचाओ का नारा बुलंद किया। यहां तक कि मशहूर नृत्य नाटिका भूमि का मंचन भी किया। भूमि की रक्षा के लिए बच्चों ने आह्वान किया हमें मिली है हमें लौटानी, हम हैं इसके ऋण में। मगर किसी के पास इतनी फुर्सत नहीं थी कि बच्चों के इस आह्वान को सुनते और समझते। यहां तो हालत ये थी कि बच्चे ही नाटक करने वाले थे और देखने वाले भी बच्चे ही थे। अपने अभिनय को सार्थक करने के लिए बच्चे सड़क पर भी लेट गए। मगर उनके लिए तालियां बजाने वाला न तो प्रशासन से कोई था और न ही वन विभाग का कोई प्रतिनिधि।
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