शिरगुल महाराज के दर्शनों को उमड़े भक्त
बद्दी (सोलन)। सोलन, सिरमौर और शिमला के आराध्य देवता शिरगुल महाराज के दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। हिमाचल के अलावा दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा और उत्तरांचल से श्रद्धालु चूड़धार स्थित शिरगुल देवता के दर्शनों को पहुंच रहे हैं। मंदिर समिति के अनुसार अभी तक एक लाख से अधिक भक्त दर्शन कर चुके हैं। मंदिर में शिवलिंग स्थापित है।
मान्यता है कि यहां पर जो भी मन्नत मांगी जाती है शिरगुल देवता उसे जरूर पूरी करते हैं। घर में घी और दूध की कमी न रहे इसीलिए यहां पर लोग दूध व घी भी चढ़ाते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए शिमला जिले के सराहां, सिरमौर के हरिपुरधार और नौहराधार से पैदल के रास्ते जाते हैं। सराहां से इसकी दूरी 10 किमी तथा हरिपुरधार से 15 किमी है। वहीं नौहराधार से 18 किमी दूर पैदल का रास्ता है। सिरमौर के उपायुक्त ओंकार शर्मा, सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. अमर सिंह चौहान, एचएएस राजेश्वर गोयल, यशपाल शर्मा, डा. अश्वनी शर्मा, तहसीलदार नरायण सिंह, लाला तुलसी राम, प्रवक्ता सुनील कमल, हरिनंद मेहता, रामभज चौहान, सरोज, कृपा राम भांगटा आदि प्रमुख लोगों का इस पवित्र तीर्थ के जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण सहयोग रहा है।
40 लाख से मंदिर में होगा नक्काशी का कार्य
बद्दी (सोलन)। चूड़धार मंदिर में चूडे़श्वर सेवा समिति की ओर से लकड़ी के बने हुए मंदिर में नक्काशी की जाएगी। इसके लिए मंडी से बड़ई को काम दिया गया है। समिति के अरुण भंडारी और रामभज चौहान ने बताया कि जिला मंडी के कारीगरों को यह नक्काशी का कार्य सौंपा गया है। ये कारीगर दो वर्ष में इसे पूरा करेंगे। जिस पर 40 लाख रुपये व्यय किया जाएगा। इस नक्काशी से मंदिर की सुंदरता में और चार चांद लगेंगे।
पीने के पानी का गहरा संकट
बद्दी (सोलन) । ट्रांसफार्मर न लग पाने के चलते यहां पर पानी की बेहद समस्या है। गर्मियों के दौरान यहां पर पानी के लिए त्राहि-त्राहि मच जाती है। हालांकि सेवा समिति ने चार खच्चरों की व्यवस्था प्रतिदिन पानी ढोने के लिए की है। इस पानी से भंडारा व श्रद्धालुओं को पीने की व्यवस्था की जाती है। समिति के प्रवक्ता सुनील कमल ने बताया कि बिजली का ट्रांसफार्मर लगते ही यहां पर उठाऊ पेयजल योजना का निर्माण कर दिया जाएगा। जिससे पेयजल किल्लत समाप्त हो जाएगी।