मनरेगा के तहत पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी अब सेटेलाइट के जरिये की जाएगी। इसके लिए सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। इस पूरी मुहिम को एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत अमलीजामा पहनाया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उस कार्य की जिओ टैगिंग की जा रही है। निर्माण कार्र्य की होने वाली इस टैगिंग में एक चिप भी लगी होगी जिसे जीपीएस सिस्टम के जरिये कहीं से भी लोकेट किया जा सकता है। इसके लोकेट होते ही निर्माण कार्य से जुड़े तमाम तकनीकी पहलू जांच एजेंसियों के समक्ष होंगे। सरकार और प्रशासन का दावा है कि इससे मनरेगा के तहत होने वाले निर्माण कार्यों में जहां पारदर्शिता आएगी वहीं भ्रष्टाचार के मामले भी घटेंगे।
गौरतलब है कि मनरेगा के तहत पंचायतों में अक्सर घपले केे मामले सामने आते रहते हैं। प्रदेश के कुछ जगह तो ऐसा भी हुआ है कि कार्य कहीं और हुआ और दिखा दिया कहीं और दिया। यही नहीं कुछ लोगों की फर्जी हाजिरी लगाकर भी पैसे डकारे गए थे। लेकिन बाद में मजदूरी सीधे मजदूरों के खाते में आने से इन मामलों में हालांकि अब कमी आई है। लेकिन निर्माण कार्यों को लेकर अक्सर आरोप अब भी लगते रहे हैं।
अब राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा के तहत वर्ष 2013 से पहले पूरे किए गए सभी कार्यों की फोटोग्राफी कर उसे ऑनलाइन किया जाएगा। इससे कोई भी व्यक्ति मनरेगा में हुुए कार्यों का ब्योरा घर बैठे देख सकेगा। इसके लिए भुवन नाम का सॉफ्टवेर तैयार किया है। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत इसका प्रयोग सोलन और सिरमौर के कुछ विकास खंडों में किया जा चुका है। अब प्रदेश के सभी विकास खंडों में यह कार्य शुरू किया जाएगा। इसे जिओ टेगिंग का नाम दिया है। इससे पहले यह कार्य फोटोग्राफी के जरिये किया जाता था। इसमें बहुत समय लगता था। जीपीएस सिस्टम से कार्य की वास्तविक लोकेशन का पता लग सकेगा जिससे मनरेगा कार्यों पर सरकार की सीधी नजर रहेगी। भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।
सभी खंडों में शुरू कर दिया है काम : शर्मा
खंड विकास अधिकारी सोलन विजय कुमार शर्मा ने बताया कि जिओ टेगिंग का कार्य सोलन के सभी विकास खंडों में शुरू किया जा चुका है। 2013 के बाद हुए सभी कार्यों की जिओ टेगिंग की जा रही है। इससे कार्य की सही लोकेशन और कार्य की गुणवत्ता का पता लग सकेगा। आने वाले समय में भ्रष्टाचार रोकने में भी मदद मिलेगी।