ऊना। हरोली विधानसभा क्षेत्र में शुरू से ही ब्राह्मणों में जंग होती रही। भाजपा और कांग्रेस से हर बार ब्राह्मण प्रत्याशी ही मैदान में उतारे गए। इमरजेंसी के बाद जनता पार्टी ने भी ब्राह्मण प्रत्याशी को मैदान में उतार कर जंग जीत ली थी।
हरोली विस क्षेत्र का प्रदेश की राजनीति में भी अहम रोल रहा है। पुनर्सीमांकन के बाद इस हलके का नाम हरोली रखा गया है। इससे पूर्व यह हलका संतोषगढ़ विधानसभा क्षेत्र से जाना जाता था। पुनर्सीमांकन के बाद अब संतोषगढ़ इलाका ऊना हलके में शामिल हो गया है। इस हलके से 1966 से लेकर विद्यासागर जोशी, कश्मीरी लाल जोशी, विजय जोशी विधायक रहे। 1998 में जय कृष्ण शर्मा भाजपा से चुनाव जीते तथा विधायक बने। जयकृष्ण शर्मा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे। इनके बाद 2003 और 2007 में कांग्रेस से मुकेश अग्निहोत्री दो बार लगातार चुनाव जीते। अगिभनहोत्री के खिलाफ पिछली बार भाजपा से हालांकि जाट नेता जगरूप सिंह मैदान में थे, लेकिन वे अग्निहोत्री को कड़ी टक्कर देने में कामयाब रहे थे। विजय जोशी इस हलके से चार बार विधायक बने तथा प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे।
हलके में हर बार ब्राह्मणों में ही जंग होती रही और ब्राह्मणों का ही कब्जा रहा। अबकी बार हरोली भाजपा में टिकट की लड़ाई अधिक रहेगी। हरोली भाजपा में टिकट के दावेदारों में पूर्व विधायक एवं पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष जयकृष्ण शर्मा के बेटे विश्वास शर्मा, जिला भाजपा महासचिव यशपाल राणा, पिछली बार हरोली से भाजपा प्रत्याशी रहे स्व जगरूप सिंह की धर्मपत्नी सतविंद्र कौर, भाजयुमो ब्लाक अध्यक्ष लखबिंद्र लक्की, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सुमित शर्मा, प्रो. राम कुमार शर्मा समेत कुछ अन्य नाम शामिल हैं। सुमित शर्मा ऊना विस से संबंधित है,ं लेकिन वह पार्टी के समक्ष हरोली से चुनाव लड़ने की इच्छा जता रहे हैं। पार्टी की सर्वे रिपोर्ट का भी टिकट आवंटन पर असर रहेगा।