जम्मू। बावे वाली माता मंदिर में नवरात्र के दौरान लोगों को अब ज्यादा मीठे वाली बर्फी भी खाने को मिल जाएगी। दुकानदारों का कहना है कि गांव से आने वाले लोगों को कम मीठे वाली बर्फी नहीं भाती है इसलिए वे ज्यादा मीठे वाली बर्फी की मांग करते हैं। ऐसे में दुकानदारों को ज्यादा मीठे वाली बर्फी बनानी पड़ती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए खास कर ग्रामीणों की पहल पर हेल्थ विंग ने नवरात्र के दौरान ज्यादा मीठे वाली बर्फी बनाने और बेचने की अनुमति दी है। इसके साथ ही हेल्थ विंग ने यह भी निर्देश दिया है कि उन्हें कम मीठे वाले बर्फी भी रखनी होगी।
गौरतलब है कि नगर निगम के हेल्थ विंग को बावे वाली काली माता मंदिर के बाजार में ज्यादा मीठे वाली बर्फी बनाने की शिकायतें मिली थीं। लोगों का कहना था कि दुकानदार ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए ऐसा करते हैं। टीम ने जब मौके पर जायजा लिया तो दुकानदारों ने अपना पक्ष रखा और कहा कि इसमें मुनाफा कमाने वाली कोई बात नहीं है। कम मीठे वाली बर्फी बनाते हैं तो गांव से आने वाले लोग उसे नहीं खरीदते हैं। जबकि शहर के लोग कम मीठे वाली बर्फी पसंद करते हैं। हेल्थ विंग ज्यादा मीठा होने पर बर्फी के सैंपल भरकर उनमें मिलावट बताते हुए जुर्माना कर देता है। दुकानदारों की बात सुनने के बाद हेल्थ अफसर ने दुकानदारों को नवरात्र के नौ दिन ज्यादा मीठे वाली बर्फी बनाने की अनुमति दे दी है। इसके साथ कम मीठे वाली बर्फी भी बनाने के निर्देेश दिये हैं। खोया, दूध, काजू, बादाम आदि क साथ गुणवत्ता पर खास ध्यान देने को कहा है। इस बाबत हेल्थ अफसर डा. विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि ज्यादा मीठी बर्फी से कोई नुकसान नहीं होता है।