जम्मू। दोमाना थाने में एक फार्मासिस्ट को कथित तौर पर अगवा करने और जमीन के दस्तावेज पर जबरन हस्ताक्षर करने के मामले में फंसे डीएसपी मदन मोहन को अग्रिम जमानत दे दी गई है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जंग बहादुर सिंह जंवाल ने दोमाना पुलिस को एफआईआर 357/2012 में दर्ज 364, 342, 149, 504, 506, 109 आरपीसी में हिरासत में नहीं लेने के आदेश दिए।
एडवोकेट रजनीश ओसवाल द्वारा पेश अर्जी को मंजूर करते हुए न्यायाधीश ने पब्लिक प्रोसीक्यूटर को पुलिस रिपोर्ट और आपत्तियां पेश करने का नोटिस जारी किया। इस बीच याची को हिरासत में नहीं लेने के आदेश दिए गए। अगर याची डीएसपी को हिरासत में लिया गया तो उसे 25 हजार रुपये के निजी और जमानती बांड पर रिहा करने के भी दोमाना पुलिस को आदेश दिया। याची को दोमाना पुलिस स्टेशन में सुबह दस बजे जांच के लिए पेश होने के आदेश दिए और जांच अधिकारी के कहने पर जांच का सहयोग करने के लिए भी अदालत ने कहा।
गवाहों और सबूतों पर दबाव नहीं डालने और बयान से किसी भी रहस्योद्घाटन की एवज में उसे एवीडेंस एक्ट की धारा 27 में हिरासत में लेने की भी पुलिस कस्टडी में रहने के आदेश दिए। डीएसपी की अर्जी के अनुसार उसे साजिश के तहत फंसाया गया है। बब्बल कुमार से उसका कोई लेना देना है और अगस्त महीने में न ही वह उसके घर पर आया।
इसी बीच, इस मामले के अन्य आरोपी मधू सूदन और अरुण सूदन को 3 नवंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। जांच अधिकारियों को दोनों आरोपियों का हर 48 घंटे के बाद मेडिकल कराने के भी आदेश दिए। दोमाना पुलिस स्टेशन में दर्ज केस के अनुसार फार्मासिस्ट बब्बल कुमार निवासी कोट को डीएसपी और अन्य तीन लोगों को अगवा किया। उसे मारा पीटा गया और कुछ प्रापर्टी के दस्तावेज पर जबरन हस्ताक्षर करने का प्रयास किया। बरनाई क्षेत्र से से अगवा करके डीएसपी के घर ले जाया गया। किसी तरह बब्बल कुमार लघुशंका के बहाने इनके चंगुल से फरार होने में कामयाब रहा। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज किया। जेएनएफ