जम्मू। ‘नानक नाम चढ़दी कलां, तेरे भाणे सरबत दा भला ..।’ इस तरह के गुरबाणी के शबद बुधवार को शहर के तमाम गुरुद्वारों में गूंजते रहे। सिखों के पहले गुरु श्री गुरुनानक देव जी के 544वें प्रकाशोत्सव पर संगत ने गुरुद्वारों में पहुंच अपनी हाजिरी लगाई। जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से मुख्य समारोह चांद नगर स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव जी में आयोजित हुआ, जहां सिख पंथ के जाने-माने रागियों और बुद्धिजीवियों ने गुरुनानक देव जी के जीवन पर प्रकाश डाला तथा श्री गुरुनानक देव जी के बताए रास्ते में चल कौम और समाज का विकास करने को कहा। समारोह की खास बात यह थी कि इसमें शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों के सिख हजारोें की संख्या में शामिल हुए। समारोह स्थल मिनी पंजाब जैसा प्रतीत हो रहा था। समागम में श्री दरबार साहिब (अमृतसर) के रागी भाई अमरीक सिंह और मेजर सिंह (लुधियाना) ने जहां अपने मधुर कीर्तन से संगत को निहाल किया, वहीं तख्त श्री दमदमा साहिब (बठिंडा) के पूर्व जत्थेदार केवल सिंह ने गुरुनानक देव जी की जीवनी पर प्रकाश डाला। इसके अलावा स्थानीय कीर्तनी जत्थों, शास्त्रीय गायिका ज्योति राकेश व अन्य ने कीर्तन व कविताएं पेश कीं। इस मौके पर जम्मू डिवीजन के आईजी दिलबाग सिंह विशेष तौर पर पहुंचे और संगत को गुरुनानक देव जी के प्रकाशोत्सव की बधाई दी। समागम में सिखों की समस्याओं और मांगों को लेकर एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसे सरकार को भेजा जाएगा। इसमें खासतौर पर बिक्रम चौक पर स्थापित जनरल बिक्रम सिंह की प्रतिमा नहीं हटाई जाए, क्योंकि इससे सिखों की भावनाएं जुड़ीं हैं। समागम के दौरान हजारों की संख्या में लोगों ने गुरुद्वारा साहिब में आयोजित लंगर छका। शहर के अन्य गुरुद्वारों में भी सुबह से ही गुरबाणी के शबद गूंजते रहे। यहां पिछले दो दिनों से चल रहे श्री अखंड पाठ के भोग भी डाले गए। डिगियाना स्थित संत मेला सिंह दस्तकारी आश्रम में भी गुरुपर्व धूमधाम से मनाया गया। समागम में स्टेट गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रेसीडेंट सुदर्शन सिंह वजीर ने संगत को गुरुनानक देव जी के बताए रास्तों पर चलने की अपील की। नंगाली साहिब के महंत मंजीत सिंह जी को उत्तराखंड में आयोजित एक समागम में विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है, जिसके कारण वे आज के समागम में संगत के बीच नहीं पहुंच सके। इस मौके पर लंगर का आयोजन भी किया गया।
छन्नी हिम्मत सिंह गुरुद्वारा गुरु का बाग में भी समागम का आयोजन किया गया, जिसमें अमृतसर और लुधियाना से पहुंचे रागी जत्थों ने संगत को निहाल किया। गुरुद्वारा साहिब के प्रेसीडेंट अजीत पाल सिंह ने संगत को गुरुपर्व की बधाई देते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के निर्देशानुसार जीवन यापन करने की अपील की। देर रात शहर के तमाम गुरुद्वारों में आतिशबाजी का भी आयोजन किया गया।