कठुआ। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में आए एक मामले ने पुलिस प्रशासन को सकते में डाल दिया है। अमूमन न्यायपालिका की चौखट पर आम आदमी पहुंचता है, लेकिन इस दफा जिला प्रशासन की मुखिया उपायुक्त जाहिदा खान ने बतौर फरियादी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सरकार बनाम सरकार के इस मामले में डीसी ने कठुआ थाना प्रभारी चंचल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की गुहार लगाई है। सीजेएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी को जांच करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि माही चक में सीज किए गए ईंट भट्ठे से जुड़ी हुई है। सीजेएम की अदालत में दायर याचिका में डीसी ने कहा है कि माही चक स्थित ईंट भट्ठा रघुवीर सिंह निवासी माही चक द्वारा गैर कानूनी ढंग से चलता पाया गया है। ब्रिक किलभन रेगुलेशन एक्ट 2010 के अनुसार गैर कानूनी पाए जाने पर प्रशासनिक टीम ने भट्ठे को सीज कर दिया। उसके बाद थाना प्रभारी को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने को कहा गया, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते एफआईआर दर्ज नहीं की गई। शिकायत में कहा गया है कि पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लेने में भी आनाकानी की। इसके चलते इस मामले को पुलिस की डेली डायरी में भी दर्ज नहीं किया गया। इतना ही नहीं ईंट भट्ठा सीज करने गई टीम में कठुआ थाना प्रभारी खुद भी शामिल थे, लेकिन उन्होंने सीजर मीमो में हस्ताक्षर भी नहीं किए। यह दर्शाता है कि उन्होंने न सिर्फ अपनी ड्यूटी को सही ढंग से करने में कन्नी काट ली बल्कि गैर कानूनी गतिविधि करने वाले आरोपी का साथ भी दिया। इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट से गुजारिश है कि वह एसएसपी को मुख्य आरोपी समेत थाना प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश जारी करें और एसएसपी स्तर के अधिकारी से मामले की जांच करवाएं। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपों को संगीन करार देते हुए एसएसपी कठुआ को धारा 202 के तहत इंक्वायरी कर छब्बीस दिसंबर से पूर्व रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।