जम्मू। कैदियों को जेलों से अदालतों तक लाने ले जाने की प्रक्रिया में हो रहे खर्चे को कम करने के लिए वीडियो कांफ्रेेंसिंग के जरिये कोर्ट और जेल को जोड़ने के प्रस्ताव पर की कवायद शुरू हो गई है। इस प्रस्ताव को लेकर कानून विभाग लगातार हाईकोर्ट के संपर्क में है। इस प्रस्ताव में आ रही अड़चनों को दूर करनेके लिए भी कानून विभाग भी कार्य कर रहा है। जेल प्रशासन ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। जल्द ही अत्याधुनिक तौर-तरीकों का उपयोग करके कैदियों की सुरक्षा, जेलों से लाने ले जाने की प्रक्रिया को कम होने की उम्मीद है। फिलहाल जम्मू कोट भलवाल और श्रीनगर सेंट्रल जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग का प्रस्ताव है।
कैदियों के कोर्ट में पेशी के दौरान चकमा देकर फरार होने की घटनाआें के बाद इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। जेल विभाग के महानिदेशक नवीन अग्रवाल के अनुसार इस प्रस्ताव से खर्च कम होगा, समय की बचत होगी और सरकार का रुपया भी बचेगा। अगर जरूरी होगा तो कोर्ट कैदी को पेश करने के आदेश दे सकती है और उस पर पूरा अमल किया जाएगा।
प्रस्ताव कानून विभाग के पास है और वह हाईकोर्ट से सीधे संपर्क में है। कुछ कानूनी अड़चनें हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। कई आतंकियों को सुरक्षा कारणों से अलग-अलग जेलों में रखा गया है। इन कैदियों को भी जिला स्तर और हाईकोर्ट में पेश करना पड़ता है और लाने ले जाने में कई दिन पहले से ही तैयारी करनी पड़ती है।