जम्मू। नेशनल कान्फ्रेंस ने बुधवार को विधानसभा में अपने तुरुप से इक्का निकाल कर विपक्षी पार्टी पीडीपी को परेशान कर दिया। बारामूला में युवक की मौत पर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के बाद जैसे ही जवाब देने के लिए नेकां के फायर ब्रांड नेता और ग्रामीण विकास मंत्री अली मोहम्मद सागर खड़े हुए, पीडीपी विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से जवाब सुनने की मांग पर सदन से वाकआउट कर दिया। इसके बाद गुस्साए सागर ने जमकर अपनी भड़ास पीडीपी पर निकालते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और नेता विपक्ष महबूबा मुफ्ती पर निशाना साधा।
सागर ने कहा कि पिछले चार साल से जब भी पीडीपी वाले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को देखते हैं, इनका चेहरा स्याह हो जाता है। डॉ. फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला के खिलाफ बोलने वालों को जवाब सुनने का भी दम होना चाहिए। सागर ने कहा कि सदन में बैठे अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को गवाह बनना पड़ेगा कि जब भी जवाब सुनने की बारी आई, पीडीपी ने वाकआउट कर दिया। सागर ने कहा कि क्यों पीडीपी को बताना चाहिए कि किसने मकबूल बट का केस नहीं लड़ा था। गुनाह छुपाने की बात करती है पीडीपी, नेता विपक्ष महबूबा को बताना चाहिए कि जिस समय जम्मू कश्मीर में आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट लागू किया गया, उस समय देश के गृह मंत्री उनके मुफ्ती साहिब नहीं थे। हालांकि उस समय डा. फारूक अब्दुल्ला ने कुर्सी छोड़ दी थी।अफस्पा लगने के साथ कश्मीर की सड़कों पर उस समय सैकड़ों लाशें चंद दिनों के भीतर बिछ गई थी। अली मोहम्मद सागर ने कहा कि वह आज खुश थे कि भाजपा, पैंथर्स और जस्मो जैसे विपक्षी दलों ने बारामूला में युवक की मौत पर अफसोस जाहिर कर हाउस से उसके परिवार को शोक प्रस्ताव भेजने की बात की लेकिन पीडीपी ने इसका उलट काम किया। सागर ने स्पष्ट किया कि घटना से संबंधित एफआईआर बारामूला थाने में आरपीसी की धारा 302 के तहत दर्ज की गई है।
दोषी पाए जाने वाले को सख्त सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी।
इससे पूर्व बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होती, विपक्षी दल पीडीपी की मांग पर स्पीकर मुबारक गुल ने स्थगन प्रस्ताव मंजूर कर बारामूला में युवक की मौत पर चर्चा को मंजूरी दी। नतीजतन विधानसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही नहीं हो सकी।