जम्मू। जब तक खाद्य सुरक्षा बिल को केंद्र में मंजूरी नहीं मिलती, जम्मू कश्मीर में राशन की आपूर्ति निर्धारित मात्रा में असंभव है। राशन की मांग और आपूर्ति में खासा अंतर है। यह अंतर खाद्य सुरक्षा बिल को अमलीजामा पहनाए जाने के बाद ही खत्म होगा।
राज्य में इस समय 16500 एमटी राशन का शार्टफाल है। शनिवार को विधानसभा में सीएपीडी और ट्रांसपोर्ट विभागों की अनुदान मांगों पर बहस का जवाब देते हुए मंत्री चौधरी रमजान ने यह जानकारी दी। मंत्री के जवाब से संतुष्ट होकर कटौती प्रस्ताव पेश करने वाले विधायकों ने अपने प्रस्ताव वापस लेकर ध्वनिमत से अनुदान मांगों को मंजूरी दी। सीएपीडी मंत्री के मुताबिक खाद्य सुरक्षा बिल से संबंधित जो सिफारिशें अथवा सुझाव राज्य की तरफ से केंद्र को भेजे गए हैं, इनके आधार पर ग्रामीण इलाकों में नब्बे फीसदी और शहरी इलाकों में अस्सी फीसदी लोगों को राशन निर्धारित मात्रा में उपलब्ध हो पाएगा। बचे हुए वर्ग को राज्य सरकार अपने स्रोतों से राशन उपलब्ध कराएगी। चौधरी रमजान ने सदन को बताया कि विभाग में 74 करोड़ रुपये की लागत से रिकार्ड के कंप्यूटरीकरण का काम जल्द शुरू होगा। इससे राशन चोरी और विभाग में भ्रष्टाचार पर काफी हद तक अंकुश लगेगा। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि जम्मू के राशन कार्ड होल्डरों को एक महीने के भीतर प्रति परिवार पैंतीस किलो राशन मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा हर स्टोर और डीलर को अलाट किया गया आटा और केरोसिन आयल भी आपूर्ति के लिए मिलेगा।
एलपीजी आपूर्ति के मसले पर चौधरी रमजान ने स्पष्ट किया कि आगामी 31 मार्च के बाद किसी भी उपभोक्ता को प्वाइंट डिलीवरी की इजाजत गैस एजेंसियों को नहीं होगी। हर उपभोक्ता के घर पर एजेंसी को सिलेंडर पहुंचाना पड़ेगा। अन्यथा एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रमजान ने स्पष्ट किया कि नया एलपीजी कनेक्शन हासिल करने के लिए साथ में गैस स्टोव खरीदना जरूरी नहीं है। इसकी कीमत दो सब्सिडी वाले सिलेंडरों के साथ 4364 रुपये निर्धारित की गई है। अगर कोई भी गैस एजेंसी इन मानकों की अनदेखी करती है, फौरन उपभोक्ता सीएपीडी विभाग के नोटिस में मामला लाए, एक्शन लिया जाएगा।
सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए वाहन चालकों को लायसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सख्त बनाने का संकेत रमजान ने दिया। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी आवेदक को लायसेंस जारी करने वाले अफसरों पर कार्रवाई होगी। राज्य परिवहन निगम को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास जारी है। निगम के बसों के मौजूदा बेडे़ को राज्य की महत्वपूर्ण सड़कों पर चलाने की कोशिश उनकी रहेगी।