जम्मू। विभिन्न योजनाओं के मद में केंद्र से मिलने वाली राशि का किस तरह दुरुपयोग होता है, इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि एक योजना के तहत केंद्र से आई राशि पर एक करोड़ 53 लाख रुपये का ब्याज बैंक से मिल गया, लेकिन मूल राशि का रियासती सरकार उपयोग उस मद में नहीं कर पाई। इसका खुलासा तब हुआ, जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में इस पर आपत्ति जताई।
कैग रिपोर्ट के अनुसार योजना सही ढंग से कार्यशील न होने के कारण रियासत के लोग दो दशक तक इसका लाभ उठाने से वंचित रह गए। इसके अलावा रियासत सरकार दो हजार करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं में उपयोगिता प्रमाण पत्र भी नहीं दे पाई, नतीजतन खर्च का ब्योरा उपलब्ध नहीं हो पाया।
रियासत के 257 सब तहसीलों के भूमि रिकार्ड के कंप्यूटरीकरण के लिए रियासत सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव सौंपा था। प्रस्ताव पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर तैयार किया गया श्रीनगर के एक तहसील के लिए विभाग की ओर से साफ्टवेयर विकसित कर पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। केंद्र सरकार ने इसके लिए 15 करोड़ 42 लाख रुपये जारी किए। केंद्र प्रायोजित योजना के तहत मिली इस राशि को हार्डवेयर आइटम, सर्वर, सिस्टम साफ्टवेयर, इलेक्ट्रिकल फिटिंग, फर्नीचर आदि के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाना था। वित्तीय आयुक्त ने इस राशि को विभागीय एकाउंट में क्रेडिट किया।
विभाग कंप्यूटर केंद्रों के लिए स्थल और इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था नहीं कर पाया लिहाजा रियासत सरकार ने इस राशि को फिक्सड डिपोजिट कर दिया। इस पर एक करोड़ 53 लाख रुपए ब्याज मिला और राशि बढ़कर 16 करोड़ 95 लाख रुपये हो गई।इस राशि को सरकार के एकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया। जून 2009 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि दूसरे राज्यों में भूमि रिकार्ड व्यवस्था के अध्ययन के लिए अफसरों को भेजा जाएगा लेकिन किसी अफसर को नहीं भेजा गया।
राशि के उपयोग की भी व्यवस्था नहीं हुई। रियासत सरकार ने बेसिक जरूरतों को पूरा किए बगैर ही प्रस्ताव केंद्र के पास भेज दिया था। इस तरह 1990 और 1996 में भी केंद्र द्वारा राशि जारी की थी जो फायदेमंद साबित नहीं हो सकी। तब इस मद में दो करोड़ 86 लाख रुपये जारी हुए थे। सीएजी ने 2005 में इस मुद्दे को उठाया था।
इस क्रम में कंप्यूटर हार्डवेयर और साफ्टवेयर की खरीद बेकार हो गई। केंद्र ने 1990 में ही भूमि रिकार्ड के कंप्यूटरीकरण के लिए राशि उपलब्ध कराना शुरू कर दिया था लेकिन रियासत सरकार द्वारा इसका इस्तेमाल नहीं किए जाने के कारण योजना का फायदा दो दशक तक लोगों को नहीं मिल पाया। कैग ने इस संबंध में 2012 में केंद्र सरकार को मामला रेफर किया है।