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फैकल्टी की कमी से प्रोजेक्टों पर तलवार

Jammu Updated Sun, 05 May 2013 05:30 AM IST
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जम्मू। रियासत के अस्पताल सीनियर फैकल्टी से लगातार खाली हो रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए नए भवनों के निर्माण पर जोर दिया जाता रहा है, मगर उन्हें चलाने के लिए पर्याप्त फैकल्टी की उपलब्धता चुनौती रही है। शहर में ही कई बड़े प्रोजेक्ट बनकर लगभग तैयार हैं लेकिन उनका श्रीगणेश करने के लिए फैकल्टी की तैनाती बड़ी समस्या बनी है।
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सुपर स्पेशलिटी प्रोजेक्ट की बात करें तो फैकल्टी की कमी को पूरा करने के लिए बाहरी राज्यों से कोई भी सीनियर डाक्टर को यहां लाने में सफलता नहीं मिल पाई है। इसके लिए बाकायदा ज्यादा भत्ते देने का प्रावधान भी रखा गया था। हालांकि कांट्रैक्चुअल स्तर पर असिस्टेंट सर्जन डाक्टरों की नियुक्ति की जा रही है।
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कार्डियो, नेफरोलाजी (डायलेसिस), न्यूरोलाजी, कार्डियो सर्जरी और न्यूरो सर्जरी यूनिट शुरू करने हैं लेकिन न्यूरो सर्जरी की बात करें तो संभाग स्तर पर एसोसिएटेड अस्पतालों में सिर्फ दो ही न्यूरो विशेषज्ञ उपलब्ध हैं, जबकि न्यूरो फिजिशियन कोई भी नहीं है। वर्ष 2013 में ही फैकल्टी से कई सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसी तरह साल दर साल बढ़ रहे मानसिक रोगियों पर जम्मू संभाग की लाखों की आबादी पर सरकारी स्तर पर सिर्फ तीन ही मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं। हेल्थ और मेडिकल एजूकेशन में मनोचिकित्सकों की कमी से मानसिक रोगियों की दिक्कतें बढ़ रही हैं। जिला स्तर पर ऐसे मरीज राम भरोसे ही हैं।
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जिला अस्पतालों में ऐसे रोगियों की पहचान करके उन्हें प्राइमरी चिकित्सा देने के लिए कुछ डाक्टरों को प्रशिक्षण देकर वहां लगाया गया है लेकिन विशेषज्ञों की कमी से यह काफी नहीं है।
दूसरी ओर से सीडी अस्पताल के साथ बीस करोड़ रुपये की लागत से नया साइक्रेटिस्ट अस्पताल का निर्माण अंतिम चरण में हैं। इस प्रोजेक्ट में संभाग का पहला डी एडिक्शन सेंटर सहित अन्य आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं लेकिन लगातार कम हो रहे मनोचिकित्सकों से ऐसे प्रोजेक्टों को शुरू करना बड़ी चुनौती रहेगा। जम्मू संभाग में मनोचिकित्सकों की कमी के पीछे एक बड़ा कारण यहां पीजी कोर्स न होना है।
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