जम्मू। डिसप्ले योर टैलेंट प्रतियोगिता के तहत मंगलवार को आयोजित लोक नृत्य स्पर्धा में अन्य नृत्यों के साथ-साथ डोगरा नृत्यों की छटा खास तौर पर बिखरी। जिस संख्या में प्रतिभागियों ने डोगरा नृत्यों को पेश किया, उससे लगा कि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति को बिल्कुल नहीं भूली है। ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह सभागार में आयोजित स्पर्धा का पहला पुरस्कार भले ही गुजराती डांडिया को मिला हो, लेकिन डोगरा नृत्यों पर सभागार में जिस प्रकार से विद्यार्थी झूमे, वह देखते ही बनता था।
महिला कॉलेज गांधी नगर ने डांडिया को पेश कर पहला स्थान हासिल किया, जबकि डोगरा लोक नृत्य जागरण को दर्शाती भारतीय कॉलेज ऑफ एजूकेशन उधमपुर की प्रस्तुति ने दूसरे स्थान पर कब्जा किया।
राजस्थानी नृत्य के लिए महिला कॉलेज परेड को तीसरा पुरस्कार दिया गया। प्रस्तुतियों के लिए टीमों को सीरियल के आधार पर बुलाया जा रहा था। सीरियल नंबर 13 की छात्राओं ने जब मैहरून रंग पंजामी, कनारी लगे नीले डोगरी कमीज और सिर पर कनारी पर दुपट्टा लेकर अपनी प्रस्तुति को ‘उच्चा ते लंमा ऐ पसार, बैठी चोल छटनियां मेरी जान’ के साथ शुरू किया तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। इस पर बांसुरी की धुन ने और कमाल कर दिया। ‘मेरी बांई च चूड़ा चांदी दा, मेरा कुन्न लड फड़या जांदी दा’ के बोल पर नृत्य पूरे शबाब पर था। सीरियल नंबर पंद्रह ने भी डोगरी नृत्य को पेश किया। छज्ज (सूप) की मदद से स्टेज को खासतौर पर डोगरा गांवों की लुक दी गई थी। प्रस्तुति के दौरान जब नव विवाहिता, जिसका पति परदेस में होता है। अपनी सास और ननद से पति के घर से बाहर रहने की शिकायत करती है को भी खूब पसंद किया गया। इससे पहले सीनियर नंबर बारह ने गुजराती नृत्य पेश किया। स्पर्धा में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर के रजिस्ट्रार डॉ. इंद्रजीत सिंह और अनुराधा सेठ कोहली ने जज की भूमिका निभाई। कैंपस की प्रथम महिला लिडा सिंह इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित थीं।
पारंपरिक थाली नृत्य ने लूट लिया शो
डिग्री कॉलेज रामबन के छात्रों द्वारा सबसे अंत में पेश किए गए थाली डांस ने शो को अपने नाम कर लिया। केवल तीन छात्रों ने पारंपरिक पोशाक और पगड़ियां पहन कर जिस प्रकार से अपनी प्रस्तुति में बारी-बारी से विभिन्न विधाओं के साथ थालियों, गिलासों और कटोरियों के साथ समन्वय बिठाया, वह कमाल का रहा। उनका रामबन जिले का स्थानीय नृत्य एक तरह से उन्होंने पृथ्वी की मूल विशेषता ग्रेविटी को चुनौती था। केवल यही नहीं, उनकी प्रस्तुति में केवल संगीत था और बोल न के बराबर थे। बेहद ऊर्जा भरे नृत्य में छात्रों ने बांसुरी, चिमटे, डोलक और खड़ताल की मदद से बजने वाले संगीत पर अपनी प्रस्तुति को पेश किया। इस खास प्रस्तुति के लिए डिग्री कॉलेज रामबन को स्पेशल प्राइज दिया गया।