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अंग प्रत्यारोपण को बाहरी राज्यों पर निर्भर

Jammu Updated Wed, 13 Nov 2013 05:43 AM IST
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जम्मू। संभाग में स्वास्थ्य के क्षेत्र में ढांचागत सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। हर साल कई निर्माण कार्यों को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इसमें एम्स जैसी तर्ज पर भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का निर्माण हुआ है लेकिन मानव अंगों के प्रत्यारोपण की सुविधा पर कुछ नहीं हो पाया है। जीएमसी और सुपर स्पेशलिटी में ही लगातार डायलेसिस मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसमें कई मामले ऐसे आते हैं, जिन्हें जिंदगी की सांसें चलाने के लिए किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत होती है लेकिन संभाग में ऐसी कोई व्यवस्था न होने से तीमारदारों को मजबूरन लाखों रुपये खर्च करके अपने मरीजों को दूसरे राज्यों में ले जाना पड़ रहा है।
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श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एंड साइंस (स्किमस) में किडनी प्रत्यारोपण करवाने वाले मरीजों को सरकार की ओर से आर्थिक राहत दी जा रही है, मगर जम्मू संभाग इस आधुनिक सुविधा से अभी पीछे है। सरकारी स्तर पर सिर्फ जीएमसी में ही डायलेसिस की सुविधा उपलब्ध है। हाल ही में गांधीनगर अस्पताल में भी डायलेसिस सुविधा को बंद कर दिया गया लेकिन किडनी प्रत्यारोपण की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। उल्लेखनीय है कि जीएमसी के डायलेसिस यूनिट सीएपीडी (होम डायलेसिस) में भले ही उत्तर भारत में ऊपर रहा है, मगर ट्रांसप्लांट जैसी सुविधा में संभाग पीछे है। वर्ष 1994 में जीएमसी के निर्माण के साथ यहां डायलेसिस यूनिट को स्थापित किया गया था। तब यहां सिर्फ 450 मरीज ही पंजीकृत थे लेकिन समय के साथ इन मरीजों की संख्या में हजारों तक पहुंच गई। जीएमसी और सुपर स्पेशलिटी में रोजाना 10 से 12 डायलेसिस हो रहे हैं लेकिन इनमें कई मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। निजी स्तर पर किडनी ट्रांसप्लांट में पांच से दस लाख रुपये तर्क का खर्चा आता है। यूनिट के एचओडी डा. एसके बाली का कहना है कि जीएमसी में ट्रांसप्लांट सुविधा मुहैया हो जाने पर किडनी मरीजों को काफी राहत मिलेगी। गत जुलाई माह से अब तक सुपर स्पेशलिटी में करीब पांच सौ मरीजों के डायलेसिस किए जा चुके हैं।
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