जम्मू। रियासत में दवा घोटालों के बाद ड्रग एंड फूड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन की लैबोरेटरी को विकसित करने की कवायद तेज की गई है। इस कड़ी में जम्मू और श्रीनगर में लैबों को अपग्रेड करने के लिए 60 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा है। हालांकि राज्य में विभिन्न प्रमुख साल्ट की दवाइयों के सैंपलों की जांच के लिए अब भी चंडीगढ़ और कोलकाता स्थित भारत सरकार की लैबोरेटरी का सहारा लिया जा रहा है। आर्गेनाइजेशन की अपनी दो लैबों में डबल शिफ्टिंग में टेस्टिंग की प्रक्रिया को भी जारी रखा गया है। ड्रग कंट्रोलर सतीश गुप्ता का कहना है कि दोनों संभागों में स्थापित लैबोरेटरी को अपग्रेड करने की दिशा में उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2013 से अब तक आर्गेनाइजेशन की ओर से 2500 से ज्यादा सैंपलों की जांच की जा चुकी है।
ड्रग एंड फूड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन की राज्य में अपनी दो प्रमुख लैबोरेटरी टेस्टिंग का काम कर रही हैं। इसमें जम्मू में पटोली क्षेत्र और श्रीनगर में डल गेट क्षेत्र में दोनों लैबोरेटरी स्थापित हैं। इन लैबोरेटरी की साल में 2500 के करीब सैंपल लेने की क्षमता है। इसमें प्रति सैंपल की रिपोर्ट तीन माह तक आ जाती है लेकिन आधुनिक मशीनों के अभाव में नये साल्ट के सैंपलों की जांच को बाहरी राज्यों की लैबोरेटरी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इसके अलावा अपनी दो लैबोरेटरी पुराने ढांचे पर ही चल रही हैं। इससे दवा घोटाले के बाद टेस्टिंग प्रक्रिया को पारदर्शिता बनाने की कोशिश की जा रही है। दवाई घोटाला सामने आने पर सरकार के दबाव के बाद बाजार और अस्पतालों में उपलब्ध हजारों साल्ट की दवाइयों में घटिया गुणवत्ता को पकड़ में लाने के लिए टेस्टिंग प्रक्रिया को मजबूत बनाया जा रहा है। चंडीगढ़ लैबोरेटरी में प्रति माह बीस के करीब कैप्सूल, टैबलेट और कोलकाता की लैबोरेटरी में प्रतिमाह 70 के करीब इंजेक्शन के सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।