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‘चलनी है तारां जिते पाउंदी हे फुहारां असां तुरयां हे...’

Jammu Updated Sat, 28 Dec 2013 05:47 AM IST
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जम्मू। जम्मू फेस्टिवल के तीसरे दिन शुक्रवार शाम को रघुनाथ बाजार में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हालांकि निर्धारित समय के बजाय थोड़ी देरी से कार्यक्रम को शुरू किया गया। रघुनाथ बाजार में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय लोक संगीत कला संस्थान के कलाकारों ने राज्य की विरासत और संस्कृति को अपने गीतों और नृत्यों के माध्यम से पेश कर दर्शकों को अपना मुरीद बना दिया।
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कार्यक्रम में डोगरी, भद्रवाही, कश्मीरी और अन्य भाषाओं का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत में स्थानीय गायकों ने स्वागत गीत गाकर दर्शकों का स्वागत किया। स्वागत गीत में हिंदी, डोगरी, भद्रवाही, कश्मीरी और संस्कृत भाषाओं का मिश्रण सुनने को मिला। इसके बाद वेद मंत्र पर कलाकारों ने नृत्य पेश किया। इस मौके पर विजय और उनके साथी कलाकारों ने अपनी सादगी के साथ पहाड़ी लोक कला गीतड़ू नृत्य और गीत पेश कर दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया। कलाकारों के द्वारा सादगी और भोलेपन के साथ पेश किए गए गीतड़ू ‘देश साड़ा हे डोगरा मीठी है साहड्ी....’ पर दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के कमाऊं इलाके में लगने वाले द्वार हाटा मेले की झलक को पेश करते हुए कलाकारों ने ओ वीणा... गीत गाकर जीजा साली के प्रेम, शरारत और नोक झोंक के दृश्य को दर्शाया। इस मौके पर चन्न माहड चढ्या पर डोगरी नृत्य पेश किया गया। वहीं गायकों ने ‘चलनी है तारां जिते पाउंदी हे फुहारां असां तुरयां हे....’ गीत गाकर डोगरी भाषा की मिठास से पर्यटकों को डोगरी भाषा से अवगत करवाया। इस मौके पर कलाकारों ने हिमाचली डोगरी गीत पर भी नृत्य को पेश किया।
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