जम्मू। कटड़ा, जम्मू और श्रीनगर शहरों में मास्टर प्लान का उल्लंघन कर हुए अवैध निर्माणों की सीलिंग पर 31 मार्च 2015 तक रोक लगाए जाने के बिल पर विधान परिषद में बुधवार को जमकर हंगामा हुआ।
विपक्ष के साथ साथ सत्तापक्ष नेकां और कांग्रेस के कई सदस्यों ने भी सरकार की नियत पर सवाल उठाए। नौबत यहां तक पहुंच गई कि बिल पारित कराने को वोटिंग करनी पड़ी। वोटिंग में सत्तापक्ष की बहुमत वाली विधान परिषद में विधेयक तो पारित हो गया, लेकिन, इसमें भी सत्तापक्ष के दो सदस्यों ने बिल का विरोध किया। पीडीपी और पैंथर्स पार्टी के सदस्यों ने बिल का विरोध करते हुए वाक आउट कर दिया। कांग्रेस सदस्य गुलाम नबी मोंगा ने कहा कि एक साल या फिर नया मास्टर प्लान बनने तक सरकार अवैध निर्माण की सीलिंग पर रोक लगा रही है। इसका अर्थ है कि उल्लंघन करने वालों को एक साल के लिए अवैध निर्माण जारी रखने का लाइसेंस दे दिया गया है। मोंगा ने यहां तक कहा कि चोरों को कहते हैं चोरी करो और चौकीदारों को कहते हैं चौकीदारी करो। उन्होंने बिल में संशोधन की मांग की और नया मास्टर प्लान तैयार करने के लिए केवल तीन महीने का समय देने की बात कही। नेकां सदस्य खालिद नजीब सोहरावर्दी, कांग्रेस सदस्य बीआर कुंडल, जहांगीर हुसैन मीर, नेकां के डॉ. बशीर अहमद वीरी ने भी कहा कि बिल से गलत धारणा बनेगी। पीडीपी सदस्य नईम अख्तर अंद्राबी ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार हो रही सीलिंग को रोकने के लिए सरकार ने बिल लाया है। यह सही नहीं है। पैंथर्स सदस्य सईद रफीक शाह ने भी सरकार की नियत पर सवाल उठाए और अतिक्रमण करवाने में सहयोग देने वालों पर कार्रवाई की मांग भी की। जवाब में शहरी विकास और स्थानीय निकाय मंत्री नवांग रिगजिन जोरा ने कहा कि उल्लंघन करने वालों में अमीर और गरीब दौनों शामिल हैं। मास्टर प्लान 2003 से रिवाइज नहीं हुआ है। प्लान में खामियां भी रहीं। शहरों जिनमें कटड़ा भी शामिल है पिछले सालों में बहुत निर्माण हुआ। चेयरमैन अमृत मल्होत्रा द्वारा वोटिंग करवाए जाने पर कांग्रेस के गुलाम नबी मोंगा और रवींद्र शर्मा के अलावा पीडीपी के नईम अख्तर और मो. अशरफ व पैंथर्स के सईद रफीक शाह ने बिल के विरोध में हाथ खड़े किए। अन्य सदस्यों के समर्थन से बिल पारित हो गया। बिल विस में पहले ही पारित हो चुका है।