जम्मू। मेडिकल कालेज जम्मू (जीएमसी) में आए दिन मशीनों के जवाब दे जाने से मरीजों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ रही हैं। पिछले तीन दिन से एमआरआई (मेगनेटिक रेसोनेंस एमेजिंग) ठप रहने से मरीजों को टेस्ट के लिए निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ा। इससे तीमारदारों को बाजार में दोगुने खर्च का मजबूरन भुगतान करना पड़ रहा है। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार एमआरआई में तकनीकी खराबी है, जिसे शुक्रवार दोपहर को बहाल कर दिया गया।
पिछले दिनों जीएमसी की इमरजेंसी की सीटी स्कैन मशीन खराब होने से मरीजों को निजी क्लीनिकों में टेस्ट करवाने पड़े थे। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने एसएमजीएस अस्पताल में मरीजों को शिफ्ट किया था, लेकिन इस प्रक्रिया में मरीजों का दर्द और बढ़ जाता है। पूरे संभाग में सिर्फ जीएमसी में एकमात्र एमआरआई मशीन चल रही है। इसमें रोजाना 15-20 एमआरआई टेस्ट हो रहे हैं। अस्पताल में इस टेस्ट के लिए मरीज को 2500 रुपये देने पड़ते हैं। जबकि बाजार में यह फीस दोगुनी है। खराब मशीन को सही करने में दिन लग जाते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि मशीन को ठीक करने के लिए दिल्ली से इंजीनियर को बुलाना पड़ता है। तकनीकी कारणों से पहले भी कई बार एमआरआई मशीन जवाब दे चुकी है।
शुक्रवार सुबह भीषण गर्मी में कई तीमारदारों को मरीजों का एमआरआई टेस्ट करवाने के लिए निजी क्लीनिकों में ला जाना पड़ा। एमआरआई के लिए अधिकांश मरीज गंभीर होते हैं। इसमें सड़क हादसों में अधिकांश गंभीर मरीजों को एमआरआई की जरूरत पड़ती है। इस टेस्ट के बाद ही मरीज का बेहतर इलाज हो पाता है।