बिजली अभियान - 2
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नहीं कोई अभियान, कैसे पूरा हो 135 करोड़ का नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बिजली चोरी में भले ही सरकारी खजाने के 135 करोड़ का चूना लग रहा हो, लेकिन अफसरों को कोई सरोकार ही नहीं है। बिजली चोरी रोकने में विभागीय अफसर नाकाम हैं। या यों कहिए कि चोरी रोकने में अफसरों की कोई दिलचस्पी ही नहीं। बिजली चोरी में 135 करोड़ प्रतिमाह का नुकसान झेलने के बाद भी हालत ये कि जनवरी के बाद जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए कोई अभियान ही नहीं चलाया गया। जनवरी में भी मात्र कुछ दिन ही अभियान की औपचारिकता पूरी की गई थी। जिम्मेदार अफसर इस बारे में बात करने को ही तैयार नहीं हैं। एक्सईएन की मानें तो वे विभाग ने अब तक बिजली चोरी के 35 मामले ही पकडे़ हैं।
जम्मू शहर में कनेक्शन भले ही वैध हो पर बिजली घूसखोरी की ही चल रही है। अधिकांश कालोनी ऐसी हैं, जिनमें घरों में मीटर वाले केबल के समांतर एक अन्य केबल भी डाला गया है, जो एसी, फ्रीज या हीटर जैसे ज्यादा खपत वाले उपकरण के लिए है। बिजली चोरी रोकने के लिए तैनात लाइनमैन की इस बिजली चोरी में मिली भगत है, अधिकारी भी मानते हैं कि बिना लाइनमैन की मिलीभगत के बिजली चोरी हो ही नहीं सकती। संजय नगर सैक्टर चार की झुग्गियों तक में बिजली के हीटर आदि चल रहे हैं। रेशमघर कालोनी, करनगर, गंगियाल, डिगयाना, नानक नगर, मुठ्ठी, रूपनगर, गुर्जर नगर, बेली चराना, जानीपुर आदि दर्जनों कालोनियां हैं जहां सरेआम तार डालकर बिजली चोरी हो रही है। विभाग के अधिकारी सर्वे करने तक ही सीमित रहे, बड़ी कार्रवाई के नाम पर हुआ कुछ नहीं।
घरों और दुकानों में 135 करोड़ की बिजली चोरी से जल रही है। हजारों मेगावाट बिजली जलने पर इसका हिसाब किताब अब विभाग के पास नहीं है। इस बिजली चोरी को विभाग ने लाइनलोस में डाला है। कनेक्शन लेने वाले लोगों का तर्क है कि हीटर जलाने के लिए 100 से 200 रुपये लाइनमैन को अदा करते हैं। जितनी बिजली प्रयोग करनी है, उतनी हम लोग कर सकते हैं।
रीडिंग हजारों की, बिल बस चार सौ का
जिन घरों में दो दो एसी लगे हैं, वहां का बिल भी सात सौ से आठ सौ रुपये। यही हो रहा है, लाइन मैन को बस दो सौ से चार सौ रुपये दो और जितनी मर्जी बिजली चलाओ। आखिर क्यों नहीं रोका जा सकता बिजली चोरी को। अफसर सरकारी खजाने में सेंध को क्यों नहीं रोक पा रहे।
तीन माह से नहीं चला कोई अभियान
बिजली चोरी रोकने के लिए तीन माह से विद्युत विभाग कोई भी अभियान नहीं चला पाया है। हालांकि जनवरी माह में विभाग ने चोरी कनेक्शनों को काटने को अभियान चलाया। कुछ दिन चलने के बाद अभियान बंद हो गया। फरवरी माह से लेकर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
बिजली चोरी रोकने के लिए टीमों का गठन किया गया है। चेकिंग के दौरान गैर कानूनी तरीके से लिए कनेक्शनों को काटा जा रहा है। लोग इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे सकते हैं।
- सुधीर गुप्ता, मुख्य अभियंता, पीडीडी