उधमपुर/रामबन। रामबन के डिगडोल में पहाड़ से पस्सियां और पत्थर गिरने के कारण वीरवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग दो बार बंद हुआ। इस कारण अमरनाथ यात्रा के जत्थे को रोकना पड़ा। जब राजमार्ग को खोला गया, तो जाम की स्थिति बन गई। इसमें अमरनाथ यात्रियों के ज्यादातर वाहन भी फंस गए। जाम के कारण यात्रा का जत्था करीब छह घंटे तक रामबन और बनिहाल के विभिन्न क्षेत्रों में फंसा रहा। शाम करीब पांच बजे जत्थे का आखिरी वाहन जवाहर टनल को पार कर घाटी की तरफ बढ़ा।
रामबन में बुधवार रात से ही तेज बारिश जारी थी। वीरवार सुबह करीब आठ बजे डिगडोल में पहाड़ से पस्सियां और पत्थर गिरने लगे। इसके बाद देखते-देखते राजमार्ग बंद हो गया। वहीं चिनैनी से अमरनाथ यात्रियों का जत्था जब रामबन पहुंचा, तो पुलिस ने उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद राजमार्ग को खोलने के लिए प्रयास शुरू हुए। सुबह करीब साढे़ नौ बजे पुलिस को राजमार्ग को खोलने में कामयाबी मिली। राजमार्ग खुलने पर कुछ वाहन घाटी की तरफ रवाना ही किए गए थे कि फिर से पहाड़ से पत्थर गिरने शुरू हो गए। इससे राजमार्ग पर आवागमन फिर से बंद हो गया। पुलिस की मशीनरी भी फिर से राजमार्ग को खोलने में जुटी। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद राजमार्ग पस्सियों और पत्थरों को हटाने में कामयाबी मिली, लेकिन तब तक राजमार्ग के दोनों तरफ अमरनाथ यात्रियों के वाहनों के अलावा अन्य सैकड़ों वाहनों की लंबी कतार लग गई।
तंग राजमार्ग पर रेंग-रेंग कर आगे बढ़ रहे थे वाहन
राजमार्ग के खुलने के बाद दोनों तरफ से वाहन रेंग-रेंग कर आगे बढ़ रहे थे। राजमार्ग के तंग होने व वाहनों की संख्या ज्यादा होने के कारण वाहन आगे बढ़ने का नाम नहीं रहे थे। वहीं पुलिस व सीआरपीएफ ने अपनी तरफ से जाम खुलवाने के लिए प्रयास शुरू किए। सबसे पहले अमरनाथ यात्रियों के वाहनों को निकालना शुरू किया गया। इस कार्य को पूरा करने में पुलिस व सीआरपीएफ को करीब छह घंटे का समय लग गया। अमरनाथ यात्रा के जत्थे का अंतिम वाहन शाम करीब पांच बजे जवाहर टनल को पार कर आगे की तरफ बढ़ा।
भूखे-प्यासे करते रहे जाम खुलने का इंतजार
जाम में फंसे रहने के कारण अमरनाथ यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुछ यात्री ऐसे स्थान पर फंस गए थे, जहां न तो कोई लंगर लगा था और न ही कोई दुकान थी। जाम के कारण प्रशासन की तरफ से मदद पहुंचना भी संभव नहीं था। इस कारण अमरनाथ यात्री भूखे प्यासे जाम के खुलने का इंतजार करते रहे। जब जाम की स्थिति से बाहर निकले तब राहत की सांस ली।