सीमावर्ती क्षेत्र के किसान तीन दिनों तक हुई गोलीबारी के थमने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हैं। स्थानीय निवासी इतने डरे हुए हैं कि अब वह खेतीबाड़ी करने के लिए अपने खेतों पर जाने से कतरा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो दिनों से भले ही पाकिस्तानी बंदूकें खामोश हैं, लेकिन वे कब गोलियां बरसाना शुरू कर दें इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को पाकिस्तान की खामोशी में भी साजिश नजर आती है।
अपनी सरकार भी नहीं रहा भरोसा
दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। कुछ ऐसा ही हाल सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों का भी है। उन्हें पाकिस्तान पर तो भरोसा है ही नहीं साथ ही भारतीय सरकार पर भी भरोसा नहीं रह गया है।
उनका कहना है कि अपने हुक्मरानों से उन्हें इतने धोखे मिले हैं कि वे उन पर भी बहुत मुश्किल से ही भरोसा करते हैं।
गौरतलब है कि अरनियां के बाद आरएस पुरा में भी पाकिस्तान की ओर से सीमा पर गोलीबारी की गई थी। इसके बाद से सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया।
हजारों एकड़ भूमि छोड़ने को तैयार
शुक्रवार सुबह सात बजे गोलीबारी रुकने के बाद भी शनिवार को दोनों की क्षेत्रों के किसानों में डर का माहौल बना हुआ था। इसके चलते तारबंदी से अपनी हजारों एकड़ भूमि पर खेती करने के किसान जाने से कतरा रहे हैं।
हालांकि यदि वे समय से धान की रोपाई नहीं करेंगे, तो उनके सामने भूखों मरने का संकट खड़ा हो जाएगा। लेकिन, उन्हें यह लगता है कि यदि वे खेतों में गए तो भी उनकी जान सुरक्षित नहीं है, क्योंकि पाकिस्तानी रेंजर कभी भी गोलीबारी शुरू कर सकते हैं।
'पीएम बनते ही खामोश हो गए मोदी'
सीमावर्ती किसान अपने हुक्मरानों पर इसलिए भरोसा नहीं करते क्योंकि रियासत के मुख्यमंत्री समेत केंद्र और राज्य के कई मंत्रियों ने उनसे हर गांव में बंकर और हर परिवार के लिए सुरक्षित स्थानों पर प्लाट का वादा किया था, जो आज तक पूरा नहीं किया गया।
हर बार गोलीबारी के बाद ऐसे वादे तो किए जाते हैं, लेकिन जल्द ही उनको भुला दिया जाता है। किसान रोशन लाल, देवपाल, विशंभरदास, मोहनलाल, उजागर सिंह, नसीब सिंह आदि ने बताया कि पाकिस्तान द्वारा आए दिन फायरिंग किए जाने पर सबसे ज्यादा मुसीबत किसानों को उठानी पड़ती है।
किसानों ने कहा कि चुनाव से पहले वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को सबक सिखाने का वादा किया था, लेकिन अब वे भी खामोश हैं। उन्होंने किसानों के जान-माल की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है।