रियासत को केंद्र के आम बजट से मायूसी हाथ लगी है। न तो कश्मीरी पंडितों को कुछ मिला और न ही रिफ्यूजियों की मदद के के लिए कोई एलान किया गया। उद्योग जगत को भी किसी प्रकार की राहत नहीं मिली।
रियासत के मृत पड़े उद्योगों को जिंदा करने के लिए 100 फीसदी सेंट्रल एक्साइज रिफंड वाली पुरानी नीति को लागू करने की घोषणा नहीं की गई। पिछले बजट में जम्मू को एम्स, आईआईटी और आईएमएम का तोहफा मिला था। एम्स और आईआईटी की दिशा में तो केंद्रीय टीम ने दौरा किया है, लेकिन आईआईएम पर कुछ विशेष नहीं हो पाया है।
रियासत के मुलाजिमों का वेतन 12000 करोड़ रुपये है जबकि आय 8500 करोड़। वेतन तक के लिए केंद्रीय मदद की जरूरत पड़ती है, लेकिन बजट में इस संबंध में कोई एलान नहीं किया गया।
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पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोई घोषणा नहीं
बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से पिछले दिनों वित्त मंत्री को उद्योगों को राहत प्रदान के लिए डीआईपीपी पैकेज के तहत इंसेटिव दिए जाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन बजट में इस पर कोई घोषणा नहीं की गई। वर्ष 2014 में बाढ़ से तबाह कश्मीर की इंडस्ट्री के विकास के लिए भी कोई प्रावधान नहीं किया गया।
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए होली डे पैकेज की मांग की जा रही थी, पर इसकी घोषणा नहीं हुई। 2000 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार करने वाली यहां की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री के उत्थान के बाबत कोई प्रयास नहीं हुए।
ससम्मान घाटी वापसी की उम्मीद लगाए बैठे कश्मीरी पंडितों को भी निराशा हाथ लगी है। पंडितों को उम्मीद थी कि पिछले बजट में सेटेलाइट टाउनशिप की बात कही गई थी। अब तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है तो बजट में इसका एलान संभव है। न तो राहत राशि बढ़ाई गई और न ही रोजगार सृजन के लिए कोई बात हुई।
पर्यटन रियासत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन इसको बढ़ावा के लिए कोई घोषणा नहीं की गई है। कश्मीर के साथ-साथ जम्मू के कुछ पर्यटन केंद्रों के विकास के बाबत उम्मीद लगाई जा रही थी कि केंद्रीय बजट में प्रावधान किया जाएगा।
टूरिज्म फेडरेशन आफ जम्मू के चेयरमैन राजेश गुप्ता का कहना है कि बजट में इंफ्रास्ट्र्क्चर पर फोकस किया गया है। हालांकि, विशेष रूप से यहां के पर्यटन के बढ़ावे के बाबत कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जब आधारभूत ढांचे का विकास होगा तो उससे पर्यटन सेक्टर का भी विकास होगा। प्रधानमंत्री की ओर से पिछले दिनों घोषित पैकेज में पर्यटन के बढ़ावे के लिए बहुत कुछ प्रावधान हैं।