पुंछ में हुए ग्रेनेड हमले को लेकर खुफिया तंत्र सकते में है। हमेशा सरहद पार की हरकतों पर नजर रखने वाले खुफिया तंत्र को सरहद के इस पार इस तरह की घटना ने नई सोच में डाल दिया है। पिछले कई साल से लगातार खुफिया एजेंसियों के पास इनपुट पहुंच रहे हैं कि राजोरी-पुंछ में 8 से 10 आतंकियों की मौजूदगी है।
लेकिन इसे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां नहीं मानतीं, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि कश्मीर संभाग की तरह जम्मू संभाग में भी आतंक फैलाने की साजिश की जा रही है, जिसका पुंछ की घटना एक ट्रेलर है।
पूर्व पुलिस महानिदेशक एमएम खजुरिया कहते हैं कि कश्मीर में आजादी की मांग करने वाले पूरे विश्व में संदेश देना चाहते हैं कि सिर्फ कश्मीर में ही नहीं, बल्कि जम्मू संभाग में भी लोग आजादी चाहते हैं। इसलिए जानबूझ कर बूढ़ा अमरनाथ यात्रा को टारगेट किया गया।
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14 साल बाद हुए धमाके से खुफिया तंत्र सकते में
- फोटो : Amar ujala
इन लोगों को जहां स्थानीय स्तर पर समर्थन मिल रहा है, वहीं पर अपना कारनामा कर रहे हैं। पुंछ में 2012 और 2013 में दो बैट हमलों के बाद ही इस बात को समझ लेना चाहिए कि कुछ शरारती तत्व आतंकियों को समर्थन दे रहे हैं। इस तरह से भीड़ में आना और ग्रेनेड फेंक कर चले जाना, इससे साफ पता चलता है कि दहशतगर्दों को बस्थानीय समर्थन मिल रहा है।
खजुरिया का यह भी कहना है कि इसमें कोई दो राय नहीं कि राजोरी-पुंछ सहित जम्मू में दोबारा आतंकी रिवाइव कर रहे हैं। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को नई सोच के साथ इस पर काम करना चाहिए।
पुंछ घटना के बाद एलओसी पर संघर्ष विराम के उल्लंघन के बाद जम्मू संभाग की एलओसी और इंटरनेशनल बार्डर पर अलर्ट कर दिया गया है। चूंकि सोमवार को स्वतंत्रता दिवस है तो पाक का सरहद पर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर समारोह को प्रभावित करने की आशंका है।
इस साल गणतंत्र दिवस पर भी पाक की ओर से संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया। पुंछ में गणतंत्र दिवस के समारोह से लौट रहे लोगों पर उस पार से गोले बरसाए गए थे। इसमें कई लोग घायल हो गए।