झूठ है कि कारवां है संग तुम्हारे
गर नहीं विश्वास जाओ कर पसारे
देख लो दुर्दिन में कर है कौन गहता
जेब खाली है तो संग है कौन रहता
कौन पढ़ता है उतरा मुख तुम्हारा
कौन लगता है गले कटुता बिसारे
झूठ है कि कारवां है संग तुम्हारे |
झूठा पूजन और है झूठा समर्पण
कामना बहुतेरे हैं नैवेद्य में अर्पण
क्या नहीं जानता विधाता मन की
देवता के सामने भी है झूठा रूदन
मन भर मिला पर ये मन ना भरा
यही तो मायामयी संसार है प्यारे
झूठ है कि कारवां है संग तुम्हारे |
निष्ठुर नयन से तीर मारे जाएंगे
पगड़ी हुक्के सब उछाले जाएंगे
सांस घट में जब तक अटकी रहेगी
तब तक ना पांव के छाले जाएंगे
अंत तक सुमिरन तुम्हारा झूठ होगा
एक एक कर विदा हो जाएंगे तारे
झूठ है कि कारवां है संग तुम्हारे |
सत्य क्या है हृदय सबके जानते हैं
रार फिर भी हर क़दम पे ठानते हैं
धुंधली आंखों में अभी रंगीन सपने
हैं स्वतंत्र विचार ये कब मानते हैं
व्यर्थ होगा अनिल ये साधन सुधन
नाव लग पाएगी किस विधि किनारे
झूठ है कि कारवां है संग तुम्हारे |
---- पंडित अनिल