अजीब सी अनबन है मेरी जिंदगी को खुशियों से,
दस्तक देती है खुशियां मेरे दरवाजे पे
खटखट की आवाज़ भी आती है,
लेकिन मैं सुनता भी कैसे
मैं जो अपने गमों में ही मशरूफ था
मुझे शौक नहीं था खुशियों का
ग़म में पहले भी जिया करते थे
लेकिन कोई आया था बहार लेके मेरी जिंदगी में
उसी ने मिलाया था मुझे खुशियों से
बस बदल सी गई थी मेरी जिंदगी
क्योंकि मेरी जिंदगी में और भी कोई आया था
वो तुम थी और खुशियां
समय बीत रहा था मैं तेरे संग जी रहा था
लेकिन मंजूर न थी खुशिया मेरी जिंदगी को
वो मंजर भी आया
जब ग़मों ने दी मेरे दरवाजे पे दस्तक
मैं सहम सा गया उसकी खटखटाहट से
सीने से जकड़ लिया उसको
पर मैं कुछ कर न पाया
उसने छीन लिया उसे मुझसे
मैं बहुत पछताया और सोचा काश
काश ई.एम.आई समय पे भर दिया होता
तो मेरा मोबाइल न दूर मुझसे होता
अनुज वर्मा
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