जीवन पथ
थका पथिक, भटका जीवन पथ है
रूका जिंदगी का विजय रथ है।
अरे! रूका है, झुका है
मगर हारा नहीं हैं।
यह अर्जुन का रथ, गांडीवधारी है
सारथी इसके अभी भी श्री कृष्ण मुरारी है।
ज्ञान गीता का बरसा रहे है
विजयपथ के पथिक, क्यों घबरा रहे हैं---?
भले ही विजय रथ का पहिया अटक गया है
कुछ क्षण के लिए पथ भटक गया है।
मगर इतना भी अभागा नहीं है
मैदान छोड़कर
अभी भागा नहीं हैं।
उठो युद्ध करो, जी-जान से लड़ो
हिम्मत से अदृश्य दुश्मन पर टूट पड़ो
सामने कुरुक्षेत्र का मैदान है
लक्ष्य भेदन में, जान है तो जहान है।
आत्मशक्ति और हौसला तुम्हारे हथियार है
सगे-संबंधी हौसला अफजाई की तलवार हैं
विजय रथ का पहिया रुकने-झुकने ना पाए
विजय पताका को तुम्हारा इंतजार हैं।
- अर्चना कोचर