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ऐतराज़

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            औरों की फ़िक्र करो कोई गिला नहीं,
        
                                                    
                            
पर मेरे हिस्से वाली करो,ऐतराज़ है मुझे।

प्यार करो औरों से कुछ न बोलूंगी,
पर मेरे हिस्से की करो ,ऐतराज़ है मुझे।

हर उस बात पे ऐतराज़ है मुझे
जिससे लगे तुम किसी और के ख्वाबों में जी रहे हो
किसी और की दुआओं के नूर बन गए हो

हां,ऐतराज़ है मुझे हरेक उस लफ्ज़ से जो तुम्हारे लिए औरों ने कहे
औरों की ख्वाहिश में तुम शामिल हुए।

हक मेरा है ऐतराज़ करने का,की तुमको ख़ुदा से भी अज़ीज़ माना है
गीता ,कुरआन, औे बाइबल से भी पाक माना है।
कि बस तुम मेरी ही दुआओं में शामिल रहो, औरों की नहीं
तुम्हारी तारीफों के कसीदे बस मेरी ही जुबां से निकले,औरों के नहीं
कि जब तक ये कायनात का वजूद है,बस तुम मेरे ही रहो,औरों के नहीं।

तुम्हारी धड़कनों में किसी और को पाऊंगी तो ऐतराज़ होगा
की बन जाओगे कभी किसी और के,
मेरी जुबां खामोश ही रहेगी,
पर मेरे रोम रोम को ऐतराज़ होगा।

- ज्योतिबाला सिंह

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6 वर्ष पहले
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