प्यार का आँगन बसायें
इक घरौंदा आ बनायें
वो कि जिसकी छत ये मेरी
बाजुओं की शह में हो..
वो कि जिसकी सब दीवारें
बस तेरी गलबह में हो...
घर वो जिसमें तेरी साँसों
से महकती बस हवा हो
प्यार खाना, प्यार पीना
प्यार ही जिसमें दवा हो...
खिड़कियों में राह मेरी
तेरी नज़रें ताकती हों..
हर झरोखे से जहाँ के
बस मुहब्बत झांकती हो..
वो कि जिसकी छत पे
आ प्रेमी परिंदे पुरसुकूँ हो
वो जहाँ न दुनियादारी
सिम्त हर इश्क़ ओ जुनूँ हो..
आ कि ये आलम सजायें...
प्यार का आँगन बसायें
इक घरौंदा आ बनायें..
- हेमन्त बोर्डिया
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