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आशा

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हार के बाद ही तो होते उजाले,
        
                                                    
                            
जीत की रौशनी पथ को दिखती।
घोर निराशा के भँवर में सो कर,
उम्मीदों की नव किरणें जगती।

दुःख के तपोवन से निकले तो,
खुशियाँ छोटी भी बड़ी दिखती।
तूफा से टकराकर बढ़े जो आगे,
कश्तियाँ वो किनारे लगती।


हाल बेहाल,बेख़ुद पथिक हो तो,
मंज़िले उसे खुद खोजती।
रात अँधेरी कितनी भी हो,
सूरज को आगे से नही रोकती।

मीनाक्षी 

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7 वर्ष पहले
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