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ग़ज़ल: अफ़साना

Binod Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे जाने के बाद एक अफ़साना लिखुंगा
        
                                                    
                            
उसमें मैं अपना नाम दीवाना लिखूंगा

तुम सांस हो तो मैं धड़कन तुम्हारा
जब सांस ना रहे, तो जिन्दगी को मर जाना लिखूंगा

तेरे हुस्न की कुछ इस तरह तारीफ़ करूंगा सनम
चेहरे को चाँद, होठों को कमल, नयनों को मयखाना लिखूंगा

कहीं लिखना होगा अपने घर का पता जानेमन
तेरे दिल को अपना स्थाई ठिकाना लिखूंगा

दो दिलों के दरम्यां ये दीवार किसने उठाई
तो "अनोखा"दुश्मन सारा जमाना लिखूंगा

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6 वर्ष पहले
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