विज्ञापन

बता दे

Brajesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्यूं तरसती हैं बांहें ये तेरे लिए
        
                                                    
                            
क्यूं बरसती निगाहें ये तेरे लिए।

है तुझ से ये क्या मेरा रिश्ता बता दे
तू इंसां है या कोई फरिश्ता बता दे।

अंधेरों में भी मेरा साया बन कर चला क्यूं
है खुदगर्ज दुनियां फिर तू इतना भला क्यूं।

किसी गैर को भी यूं गले से लगाना
क्या इसे ही मोहब्बत कहता ज़माना।

इशारों में ही सही पर तू इतना पता दे
तू हकीकत है या कोई सपना बता दे।
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all