क्यूं तरसती हैं बांहें ये तेरे लिए
क्यूं बरसती निगाहें ये तेरे लिए।
है तुझ से ये क्या मेरा रिश्ता बता दे
तू इंसां है या कोई फरिश्ता बता दे।
अंधेरों में भी मेरा साया बन कर चला क्यूं
है खुदगर्ज दुनियां फिर तू इतना भला क्यूं।
किसी गैर को भी यूं गले से लगाना
क्या इसे ही मोहब्बत कहता ज़माना।
इशारों में ही सही पर तू इतना पता दे
तू हकीकत है या कोई सपना बता दे।