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पथिक तेरा चैन

Govind Das

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यहां नजर भोर की है
        
                                                    
                            
जन शोर की है
पर तू जाग गया
एक साहूकार की, एक चोर की
जहां पर्वत है वहां अंधेरा है
वहीं पथ यात्री तेरा अगला डेरा है
आगे कुआं है पीछे खाई है
गिनती भी गिनना भूल गई
तूने इतनी बार मात खाई है
जहां निशा है उस और दिशा है
जब दिखे पानी की झलक
ऊपर हरियाली का फलक
जब दो दीवारों बीच से ,
दो पंख सहित से
आए रविसेन
तभी पथिक तुझे मिलेगा चैन
तभी पथिक तुझे मिलेगा चैन
 
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4 वर्ष पहले
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