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आशा...

HORI LAL

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आशा किसी से नहीं लगाना,
        
                                                    
                            
इतना मेरा मान लो कहना।
आशा से हर काम बिगड़ता,
इसको दुश्मन आप समझना।।

आशा कोई जब तोड़ता,
दिल के टुकड़े-टुकड़े होता।
वह बाहर से जरूर हंसता,
किंतु अंदर से रोता होता।।

अपनी शक्ति वह खो देता,
आशावादी जो बन जाता।
क्या करना है यह भी भूले,
वह केवल पछताता रहता।।

अपने इस छोटे से जीवन में
आशा को बड़े पास से देखा
आशा जब निराशा में बदले
इंसान को पागल होते देखा।।

तुम आशा छोड़ो कर्म करो
नाता आशा से ना रखना
दुनिया को मुट्ठी में कर लो
होरी लाल विनीता का कहना।।
3 वर्ष पहले
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