कंपित कंठ रुधिर होकर
कर रहा है पुकार,
आ गया है मानव पर खतरा
अब तो जागो सरकार
सता के लालच से बाहर निकलो तो जनाब
क्या इसी दिन के लिए जनता ने
आपको बनाया था सरदार?
देश की जनता का ऋण है तुमपे
तुम हो इस देश के कर्जदार,
जीवन की सुरक्षा का भविष्य की रक्षा का
कौन देगा जवाब?
वादा तो किया था विकास का
समय आ रहा है विनाश का
राष्ट्र को मजबूत बनाने को
जन मानस के जीवन को प्रलय से बचाने को
जनता कर रही विनती बार बार
अब तो जागो सरकार