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परिश्रम

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कर हिम्मत और दिखा दे तू भी
        
                                                    
                            
नियति बदल मत बन तू भाग्यवादी
भूल मत तू झुका सकता है रब को भी
आलस नहीं चाहिए मेहनत
उठ और कुछ कर
बन जा तू मेहनतवादी
डर मत तू साथ है खुद के इस वक्त भी
उठा कलम और रच दे इतिहास अभी।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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2 वर्ष पहले
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