जब शुरू किया होगा कवि ने,
कविता लिखना
अंतर्मन में फूटी होगी,
नए शब्दों, भावों की कोंपले
कविता को,
कवि से पाठक तक आते हुए,
गुजरे होंगे कई दिन
बीती होगी कई रातें
कई बार,
कागज पर उकेरी हुई पंक्तियां
गई होंगी,
कूड़ेदान में
कई बार,
किसी पंक्ति को लिखते हुए
सुखी होगी,
कलम की स्याह
कई बार,
ज़ेहन से कलम तक आते-आते
बदले होंगे कई शब्द,
बिखरी होगी कई पंक्तियां
कवि से पाठक तक
कविता की यात्रा,
कभी सुगम रही होगी
तो कभी, दुर्गम
कभी वह,
सहज स्वीकारी गई होगी
तो कभी,
सिरे से नकारी गई होगी।
– जयराज सिंह गौड़
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