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मातृभाषा हिंदी (अंताक्षरी)

Jigyasa Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
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हिय में बसी
शीश चढ़ बिहँसी
जैसे बिन्दी

वर्ण
होंठ से कंठ
शोभित तालु आकंठ
माला जड़ित स्वर्ण

वर्णमाला
तालमय
सुरमय
अमृत प्याला

व्याख्या
शब्द एक
अर्थ अनेक
समुचित आख्या

परिभाषा
असंभव
और संभव
भरी आशा

व्याकरण
दुर्लभ
सुलभ
नहीं कोई आवरण

समृद्धि
संपूर्णता का ताज
भाषा सरताज
थोड़ी सी सिद्धि

अभिनंदन
हिंदी का
माथे से बिंदी का
हार्दिक मिलन

आस
जगत की आधार
भाषाओं की खेवनहार
विश्वास

शुभकामना
उत्थान उत्कर्ष
गाह्य सहर्ष
प्रार्थना

- जिज्ञासा सिंह
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4 वर्ष पहले
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